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23 साल बाद बनेगा महासंयोग, नागपंचमी और सोमवार एक साथ; भद्रा मुक्त रक्षाबंधन पर दिनभर बांधी जा सकेगी राखी
 

 

वाराणसी। इस वर्ष सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद विशेष और फलदायी माना जा रहा है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, सावन के चार सोमवारों में से दो सोमवार दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों से युक्त रहेंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण संयोग सावन के तीसरे सोमवार, 17 अगस्त 2026 को बनने जा रहा है, जब नागपंचमी और सोमवार एक ही दिन पड़ेंगे।

प्रो. द्विवेदी ने बताया कि सामान्यतः नागपंचमी सावन सोमवार के आसपास पड़ती है, लेकिन सोमवार और नागपंचमी का एक ही दिन होना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। ऐसा महासंयोग पूरे 23 वर्ष बाद बन रहा है। इससे पहले यह संयोग वर्ष 2003 में बना था। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन प्रातःकाल भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने से राहु-केतु से जुड़े दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है।

उन्होंने बताया कि ज्योतिष संहिता ग्रंथ के अनुसार इस वर्ष नागपंचमी के दिन सिंह संक्रांति भी पड़ रही है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। श्रावण मास में सोमवार के दिन सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश होने पर छत्र भंग नामक योग का निर्माण होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे सत्ता परिवर्तन या बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत माना जाता है।

हालांकि, प्रो. द्विवेदी ने इसका सकारात्मक पक्ष भी बताया। उनके अनुसार सोमवार का संबंध चंद्रमा से है, जो जनसामान्य, मन, शीतलता और संतोष का कारक माना जाता है। ऐसे में यह विशेष संयोग समाज में संतुलन, संतोष, स्थिरता और सामाजिक समन्वय को बढ़ावा देने वाला सिद्ध हो सकता है।

वहीं, भाई-बहन के पवित्र पर्व रक्षाबंधन को लेकर भी इस बार शुभ संयोग बन रहा है। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा और सबसे बड़ी बात यह है कि इस दिन भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। भद्रा मुक्त रक्षाबंधन का ऐसा संयोग पूरे पांच वर्ष बाद बन रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में भद्रा रहित रक्षाबंधन मनाया गया था।

भद्रा न होने के कारण बहनें पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे प्रारंभ होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पर्व उदय तिथि में मनाया जाएगा। इस कारण राखी बांधने का मुख्य और श्रेष्ठ मुहूर्त 28 अगस्त को प्रातः 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि लगभग 3 घंटे 51 मिनट होगी।

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो सावन और रक्षाबंधन के ये दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं और सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखते हैं।