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आस्था के आगे हार गई उम्र! 116 साल की महिला ने पैदल चढ़ीं तिरुमला की 3550 सीढ़ियां, VIDEO देख लोग कर रहे सलाम
 

 

जहां कम उम्र के लोग भी तिरुमला की कठिन चढ़ाई के दौरान कई बार रुक जाते हैं, वहीं 116 साल की एक बुजुर्ग महिला ने अपने अटूट विश्वास और हिम्मत से सभी को हैरान कर दिया. कर्नाटक से परिवार के साथ आईं इस महिला का तिरुमला तक पैदल सफर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उनकी हिम्मत को सलाम कर रहे हैं.

आस्था इंसान से क्या कुछ नहीं करा सकती, इसका ताजा उदाहरण आंध्र प्रदेश के तिरुमला में देखने को मिला है. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें 116 साल की एक बुजुर्ग महिला तिरुमला की पहाड़ियों पर बनी लंबी और कठिन सीढ़ियां पैदल चढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं.

उनकी उम्र जानने के बाद हर कोई हैरान है, क्योंकि जिस रास्ते पर नौजवान भी थककर बैठ जाते हैं, उसे उन्होंने अपने मजबूत इरादों के दम पर पूरा किया. वीडियो सामने आने के बाद हजारों लोग इसे प्रेरणा की मिसाल बता रहे हैं. लोगों का कहना है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है. अगर मन में विश्वास और हिम्मत हो, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती.

कर्नाटक से परिवार के साथ पहुंचीं दर्शन के लिए

बताया जा रहा है कि यह बुजुर्ग महिला अपने परिवार के साथ कर्नाटक से तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने आई थीं. परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि इतनी अधिक उम्र में वह पहाड़ी तक कैसे पहुंचेंगी. लेकिन महिला ने गाड़ी का सहारा लेने के बजाय पैदल चढ़ाई करने की इच्छा जताई. परिवार ने भी उनका हौसला बढ़ाया और पूरे रास्ते उनका हाथ थामे उनके साथ चलता रहा. इसी दौरान वहां मौजूद एक श्रद्धालु ने इस पूरे सफर का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच चुका है.

3550 सीढ़ियां... फिर भी नहीं छोड़ा हौसला

तिरुमला पहुंचने का अलीपिरी मार्ग देश के सबसे कठिन धार्मिक ट्रेकिंग रूट्स में गिना जाता है. करीब 11 किलोमीटर लंबे इस रास्ते में लगभग 3550 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यह रास्ता शेषाचलम की पहाड़ियों से होकर गुजरता है. यहां चढ़ाई लगातार बनी रहती है, इसलिए कई लोग बीच-बीच में आराम करते हुए ऊपर पहुंचते हैं. ऐसे में 116 साल की दादी का यह सफर लोगों को और भी ज्यादा हैरान कर रहा है. वीडियो में वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए दिखाई देती हैं. उनके परिवार के सदस्य लगातार उनका सहारा बने रहते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर कहीं भी घबराहट या हार मानने जैसा भाव नजर नहीं आता.

आस्था बनी सबसे बड़ी ताकत

वीडियो देखने वाले लोगों का कहना है कि यह सिर्फ शारीरिक ताकत की बात नहीं है, बल्कि यह विश्वास और श्रद्धा की शक्ति है. बुजुर्ग महिला हर सीढ़ी को पूरी शांति और धैर्य के साथ पार करती दिखाई दे रही हैं. उनकी चाल भले ही धीमी हो, लेकिन उनका आत्मविश्वास हर किसी को प्रेरित कर रहा है. कई लोगों ने लिखा कि भगवान में अटूट आस्था ही उन्हें इस उम्र में इतनी बड़ी यात्रा पूरी करने की ताकत दे रही थी.

सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर की तारीफ

वीडियो वायरल होने के बाद कमेंट सेक्शन लोगों की भावनाओं से भर गया. एक यूजर ने लिखा कि 116 साल की उम्र में इतना जज्बा... सच में यह देखने लायक पल है. दूसरे यूजर ने लिखा कि हम छोटी-सी परेशानी में हार मान लेते हैं और दादी ने पूरी दुनिया को हिम्मत का मतलब समझा दिया. एक अन्य यूजर ने कहा कि यह वीडियो देखकर समझ आता है कि सच्ची श्रद्धा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती. कई लोगों ने उन्हें भारत की सबसे प्रेरणादायक श्रद्धालुओं में से एक बताया.

दर्शन से पहले ही बन गईं लोगों के लिए प्रेरणा

तिरुमला आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस बुजुर्ग महिला की हिम्मत की खूब सराहना की. रास्ते में कई लोग उन्हें देखकर रुक गए. कुछ ने उनका हौसला बढ़ाया, तो कुछ ने हाथ जोड़कर उनका सम्मान किया. कई श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने पहली बार इतनी उम्र में किसी व्यक्ति को इतनी कठिन चढ़ाई करते देखा है.

मंदिर प्रशासन ने भी सराहा जज्बा

स्थानीय लोगों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि महिला का यह सफर सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि इंसानी इच्छाशक्ति की मिसाल है. लोगों का मानना है कि आज के समय में, जब छोटी-छोटी मुश्किलों से लोग परेशान हो जाते हैं, तब यह बुजुर्ग महिला यह सिखा रही हैं कि अगर मन मजबूत हो, तो कोई भी रास्ता कठिन नहीं होता.

उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है

यह वायरल वीडियो सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की यात्रा की कहानी नहीं है. यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो उम्र या परिस्थितियों को अपनी कमजोरी मान लेते हैं. 116 साल की इस श्रद्धालु ने यह साबित कर दिया कि मंजिल तक पहुंचने के लिए सबसे जरूरी चीज मजबूत इरादा और विश्वास होता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को सिर्फ शेयर नहीं कर रहे, बल्कि इसे उम्मीद, हिम्मत और अटूट आस्था की सबसे खूबसूरत मिसाल भी बता रहे हैं. उनके इस सफर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब मन में श्रद्धा हो, तो उम्र भी रास्ता नहीं रोक सकती.