August Vrat-Tyohar 2026: रक्षाबंधन से लेकर हरियाली तीज, अगस्त महीने में पड़ेगे कई व्रत-त्योहार, देखें पूरी लिस्ट
अगस्त 2026 की शुरुआत सावन मास के शुभ संयोग में हो रही है। भगवान शिव की आराधना को समर्पित यह महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे महीने श्रद्धालु सावन सोमवार, मंगला गौरी व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाएंगे। इसके अलावा अगस्त में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण भी पड़ेंगे, जिन्हें लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता रहती है।
अगस्त 2026 में कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण?
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12 अगस्त 2026: सूर्य ग्रहण
समय: रात 9:04 बजे से 13 अगस्त सुबह 4:25 बजे तक।
यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। -
28 अगस्त 2026: चंद्र ग्रहण
समय: सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।
यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा।
अगस्त 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार
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2 अगस्त (रविवार): गजानन संकष्टी चतुर्थी
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3 अगस्त (सोमवार): पहला सावन सोमवार व्रत
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4 अगस्त (मंगलवार): पहला मंगला गौरी व्रत
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5 अगस्त (बुधवार): सावन कालाष्टमी
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7 अगस्त (शुक्रवार): मासिक कार्तिगाई
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8 अगस्त (शनिवार): रोहिणी व्रत
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9 अगस्त (रविवार): कामिका एकादशी
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10 अगस्त (सोमवार): दूसरा सावन सोमवार, सोम प्रदोष व्रत
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11 अगस्त (मंगलवार): दूसरा मंगला गौरी व्रत, सावन शिवरात्रि
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12 अगस्त (बुधवार): सावन अमावस्या, हरियाली अमावस्या, सूर्य ग्रहण
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13 अगस्त (गुरुवार): श्रावण शुक्ल पक्ष प्रारंभ
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15 अगस्त (शनिवार): हरियाली तीज
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16 अगस्त (रविवार): विनायक चतुर्थी
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17 अगस्त (सोमवार): तीसरा सावन सोमवार, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति
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18 अगस्त (मंगलवार): तीसरा मंगला गौरी व्रत, कल्कि जयंती
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19 अगस्त (बुधवार): तुलसीदास जयंती
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20 अगस्त (गुरुवार): मासिक दुर्गाष्टमी
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23 अगस्त (रविवार): श्रावण पुत्रदा एकादशी
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24 अगस्त (सोमवार): चौथा सावन सोमवार
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25 अगस्त (मंगलवार): चौथा मंगला गौरी व्रत
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26 अगस्त (बुधवार): ओणम
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27 अगस्त (गुरुवार): श्रावण पूर्णिमा व्रत
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28 अगस्त (शुक्रवार): रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण
धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है अगस्त?
अगस्त 2026 में पूरा महीना सावन के पावन वातावरण में बीतेगा। भगवान शिव की आराधना, सोमवार व्रत, मंगला गौरी पूजन, हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे पर्व इस महीने को विशेष बनाते हैं। साथ ही सूर्य और चंद्र ग्रहण का संयोग भी इसे ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह महीना पूजा-पाठ, व्रत और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर लेकर आया है।