Holi 2026: 2 मार्च को होलिका दहन, 4 मार्च को रंगों की होली; जानें शुभ मुहूर्त और तिथि
वाराणसी। होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त को लेकर काशी के विद्वानों ने अपनी राय दी है। शास्त्रीय गणना और लोकाचार को ध्यान में रखते हुए विद्वानों का कहना है कि 2 मार्च 2026 की रात 11:57 बजे से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है, जबकि 4 मार्च को होली खेली जाएगी।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि में होलिका दहन किया जाता है और प्रतिपदा तिथि में रंगोत्सव मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 2 मार्च को भद्रा का प्रभाव रहेगा, जिसके कारण भद्रा काल में दहन वर्जित माना गया है। हालांकि लोकाचार को ध्यान में रखते हुए रात 11:57 बजे के बाद होलिका दहन किया जा सकता है। शुद्ध शास्त्रीय मान्यता के अनुसार 3 मार्च को भी होलिका दहन संभव है।
विश्वविद्यालय के ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र विभाग द्वारा फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, संवत् 2082 (ईस्वी सन् 2026) के अवसर पर शास्त्रीय, ज्योतिषीय और धर्मशास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर परीक्षण किया गया। धर्मशास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि श्रावणी और फाल्गुनी पूर्णिमा में भद्रा काल के दौरान दहनादि कृत्य नहीं किए जाने चाहिए।
शास्त्रीय गणना के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को सूर्योदय पूर्णिमा में होगा, जबकि 4 मार्च को प्रतिपदा तिथि अपराह्न तक विद्यमान रहेगी। इसलिए 4 मार्च को होली मनाना शास्त्रोचित रहेगा।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार रात में पूर्णिमा मिलने पर ही होलिका दहन किया जाना चाहिए। इस वर्ष 2 मार्च को पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का भी आरंभ हो रहा है। पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5:21 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 4:34 बजे तक रहेगी। भद्रा का मुख भाग रात्रि 2:03:45 बजे से 4:03:45 बजे तक रहेगा। धर्मसिंधु के अनुसार भद्रा के मुख भाग को छोड़कर आधी रात के बाद दहन किया जा सकता है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि 2 मार्च की रात 11:57 बजे से 1:15 बजे तक भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ समय है। उन्होंने कहा कि 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से भद्रा प्रारंभ होकर लगभग 12 घंटे तक प्रभावी रहेगी, जो 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक रहेगी। चूंकि दहन पुच्छ काल में होगा, इसलिए इसे शुभ माना जाएगा।
विद्वानों के अनुसार भारतीय सनातन संस्कृति में होली केवल लोकानुरंजन का पर्व नहीं, बल्कि धर्म, दर्शन, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का महापर्व है। शास्त्रीय मर्यादाओं के अनुरूप होलिका दहन और होली उत्सव मनाने की अपील की गई है।