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चैत्र नवरात्रि का छठा दिन:मां कात्यायनी के दर्शन से भय से मिलती मुक्ति, हल्दी लेपन से कन्याओं को मिलता है मनचाहा वर

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन वाराणसी आत्मावीरेश्वर मंदिर में मां कात्यायनी की पूजा के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मान्यता है कि माता को हल्दी अर्पित करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा वर या वधू प्राप्त होता है।

 

Chaitra Navaratri 2026: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान के साथ की जा रही है। काशी के पक्का महाल में स्थित संकठा माता मंदिर के पीछे आत्मावीरेश्वर महादेव मंदिर में स्थित मां के दर्शन को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां भक्त माता के चरणों में शीश नवाकर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।

मंदिर परिसर में भगवान गणेश, शनि महाराज, शुक्र और मंगल ग्रहों की शांति के लिए भी विशेष पूजन-पाठ कराया जा रहा है। मंदिर के महंत के अनुसार, नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की उपासना का विशेष महत्व है, विशेषकर विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए।

मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं यदि 40 दिनों तक माता के चरणों में हल्दी का लेपन करती हैं, तो उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है। वहीं युवक भी इसी श्रद्धा से पूजा करें तो उन्हें योग्य जीवनसाथी मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी है और उनके दर्शन से जन्म-जन्मांतर के कष्ट दूर होते हैं।

पंडित कुलदीप मिश्रा के अनुसार, मां कात्यायनी की उत्पत्ति ऋषि कात्यायन के तप से हुई थी, जिन्होंने देवी दुर्गा से पुत्री रूप में जन्म लेने का वरदान मांगा था। इसके बाद देवी ने उनके घर जन्म लिया और कात्यायनी के नाम से विख्यात हुईं। माता को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए भक्त इस दिन पीले वस्त्र और हल्दी अर्पित कर विशेष पूजा करते हैं।