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हर तस्वीर में कंबल क्यों ओढ़ते दिखते हैं नीम करौली बाबा? जानिए कैंची धाम से जुड़ी ये रहस्यमयी मान्यता

नीम करौली बाबा के कंबल और ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ से जुड़ी उपरोक्त कहानी धार्मिक आस्था, भक्तों के अनुभवों और प्रचलित लोकमान्यताओं पर आधारित है। इस घटना का कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसका उद्देश्य किसी धार्मिक मान्यता को प्रमाणित या खारिज करना नहीं है।
 

Neem Karoli Baba Blanket Mystery: नीम करौली बाबा इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ी है और इसी के साथ भक्त बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनसे जुड़ी कथाओं के बारे में जानना चाहते हैं। बाबा की तस्वीरों में एक चीज अक्सर नजर आती है—उनका साधारण कंबल।

चाहे मौसम कोई भी हो, नीम करौली बाबा अक्सर कंबल ओढ़े दिखाई देते थे। यही वजह है कि उनके भक्तों के बीच यह सवाल आज भी चर्चा में रहता है कि आखिर बाबा हमेशा कंबल ही क्यों ओढ़ते थे? बाबा के इस कंबल से जुड़ी कई मान्यताएं और कहानियां भी प्रचलित हैं। इनमें से एक कहानी को उनके भक्त और अमेरिकी लेखक रिचर्ड अल्बर्ट (रामदास) से भी जोड़ा जाता है।

क्यों खास माना जाता है बाबा का कंबल?

नीम करौली बाबा के कंबल को लेकर भक्तों के बीच अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि बाबा बीमार और परेशान लोगों पर अपना कंबल डालते थे और इससे उन्हें राहत मिलती थी। कुछ श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि बाबा कंबल के जरिए अपनी आध्यात्मिक शक्तियों को छिपाकर रखते थे।

बाबा को अक्सर नीले या हल्के रंग के कंबल में देखा गया है। भक्त इन रंगों को शांति और आध्यात्मिक स्थिरता से जोड़ते हैं। बाबा की अधिकांश लोकप्रिय तस्वीरों में कंबल दिखाई देने के कारण यह उनके व्यक्तित्व की पहचान जैसा बन गया।

इसी आस्था के चलते कैंची धाम आने वाले कई श्रद्धालु बाबा को समर्पित करते हुए कंबल भी चढ़ाते हैं।

रामदास की किताब में ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ का जिक्र

नीम करौली बाबा के भक्त रहे अमेरिकी लेखक और मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्बर्ट, जिन्हें बाद में रामदास के नाम से जाना गया, ने 1979 में बाबा से जुड़े अनुभवों पर आधारित किताब ‘Miracle of Love’ लिखी थी।

इसी किताब से जुड़ी चर्चाओं में बाबा के ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ की कहानी का भी उल्लेख मिलता है। यह कहानी बाबा के भक्तों के बीच आज भी काफी लोकप्रिय है।

क्या है ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ की रहस्यमयी कहानी?

बाबा के कंबल से जुड़ी एक कहानी फतेहगढ़ के एक बुजुर्ग दंपत्ति से संबंधित बताई जाती है। यह घटना वर्ष 1943 की बताई जाती है।

कहा जाता है कि बुजुर्ग दंपत्ति नीम करौली बाबा के भक्त थे। एक दिन अचानक बाबा उनके घर पहुंचे और कहा कि वह रात वहीं रुकेंगे। बाबा के आने से दंपत्ति बेहद खुश हुए और उन्होंने उनकी सेवा की।

रात में भोजन करने के बाद बाबा कंबल ओढ़कर चारपाई पर लेट गए। कुछ देर बाद बुजुर्ग दंपत्ति सोने चले गए, लेकिन रातभर उन्हें बाबा की कराहने की आवाज सुनाई देती रही।

उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे बाबा किसी तकलीफ में हैं या कोई उन्हें मार रहा है। परेशान होकर दोनों बाबा की चारपाई के पास बैठ गए और पूरी रात उन्हें देखते रहे।

सुबह बाबा ने कंबल पानी में बहाने को कहा

कहानी के मुताबिक, सुबह बाबा उठे और अपना कंबल समेटकर बुजुर्ग दंपत्ति को दे दिया। उन्होंने उनसे कहा कि इस कंबल को पानी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद बाबा ने दंपत्ति को आश्वासन दिया कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है और करीब एक महीने में उनका बेटा वापस लौट आएगा। बुजुर्ग दंपत्ति ने बाबा की बात मानते हुए कंबल को पानी में प्रवाहित कर दिया।

एक महीने बाद लौटा सैनिक बेटा

कहानी के अनुसार, करीब एक महीने बाद दंपत्ति का बेटा घर वापस आया। वह सेना में था और युद्ध में शामिल था। बेटे को सुरक्षित देखकर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

लेकिन इसके बाद बेटे ने जो घटना बताई, उसने माता-पिता को हैरान कर दिया।

उसने बताया कि करीब एक महीने पहले दुश्मनों ने उनकी टुकड़ी को घेर लिया था। रातभर भीषण गोलीबारी हुई। उसके कई साथी मारे गए, लेकिन वह सुरक्षित बच गया। सैनिक के मुताबिक, इतनी भारी गोलीबारी के बावजूद उसके शरीर में एक भी गोली नहीं लगी। कहा जाता है कि जिस रात सैनिक पर यह संकट आया था, उसी रात नीम करौली बाबा उस बुजुर्ग दंपत्ति के घर ठहरे हुए थे।

भक्त मानते हैं बाबा ने अपने ऊपर ले लिया था संकट

भक्तों के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार, बाबा ने सैनिक पर आने वाले संकट को अपने ऊपर ले लिया था। इसी वजह से गोलियों की बौछार के बावजूद सैनिक सुरक्षित बच गया और बाबा रातभर कराहते रहे।

इसी घटना को बाबा के कंबल से जोड़कर देखा जाता है और भक्तों के बीच इसे ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ की रहस्यमयी कहानी के तौर पर बताया जाता है। हालांकि, इस घटना के समर्थन में कोई पुख्ता ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे बाबा के भक्तों के बीच प्रचलित आस्था और लोककथा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

कैंची धाम में क्यों चढ़ाते हैं कंबल?

नीम करौली बाबा की तस्वीरों में लगातार कंबल नजर आने और उनसे जुड़ी ऐसी कथाओं के प्रचलित होने के कारण कंबल धीरे-धीरे उनकी भक्ति और स्मृति से जुड़ गया। इसी आस्था के चलते कैंची धाम आने वाले कई श्रद्धालु बाबा को कंबल अर्पित करते हैं। भक्तों के लिए यह केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि बाबा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

Disclaimer: नीम करौली बाबा के कंबल और ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ से जुड़ी उपरोक्त कहानी धार्मिक आस्था, भक्तों के अनुभवों और प्रचलित लोकमान्यताओं पर आधारित है। इस घटना का कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसका उद्देश्य किसी धार्मिक मान्यता को प्रमाणित या खारिज करना नहीं है।