संकटमोचन संगीत समारोह : शिवमणि की प्रस्तुति ने बाल्टी और ड्रम से बांधा समां, मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
वाराणसी के प्रसिद्ध संकटमोचन संगीत समारोह में मंगलवार की शाम संगीत और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। मंच पर पद्मश्री शिवमणि की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी लय और ऊर्जा ने पूरे हनुमत दरबार को तालियों की गूंज से भर दिया।
बाल्टी, शंख और घंटियों से रचा अनोखा संगीत
शिवमणि ने मंच पर आते ही अपने अनोखे अंदाज से सभी को चौंका दिया। पारंपरिक ड्रम सेट के साथ उन्होंने खाली और पानी से भरी बाल्टियां, शंख, शृंगी, घंट-घड़ियाल और घुंघरू जैसे साधारण वस्तुओं को वाद्य यंत्र बना दिया।
जब उनकी स्टिक ड्रम से निकलकर इन वस्तुओं पर लयबद्ध तरीके से चली, तो पूरा माहौल रोमांचित हो उठा और दर्शक तालियों से गूंज उठे।
मेडोलिन और पखावज की शानदार जुगलबंदी
इस प्रस्तुति में प्रसिद्ध मेडोलिन वादक पंडित यू. राजेश ने सुरों का बेहतरीन साथ दिया, जबकि शिवमणि के शिष्य प्रियेश पाठक ने भी संगत की।
कार्यक्रम के दौरान संकटमोचन मंदिर के महंत विश्वंभर नाथ मिश्र ने भी मंच पर पहुंचकर पखावज पर ताल मिलाई, जिससे प्रस्तुति और भी खास बन गई।
भक्ति रस में डूबा पूरा वातावरण
वादन के बीच ‘रघुपति राघव राजा राम’, ‘अच्युतम केशवम’ और ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ जैसी भक्ति धुनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
अंत में शंखनाद के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ, लेकिन इसकी गूंज लंबे समय तक श्रोताओं के मन में बनी रही।
150 कलाकारों का संगम, सांस्कृतिक एकता का संदेश
इस भव्य आयोजन में कुल 45 प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं, जिनमें 12 पद्म पुरस्कार विजेता, 21 नए कलाकार और 12 अनुभवी कलाकार शामिल हैं। करीब 150 कलाकारों की भागीदारी वाले इस समारोह में 12 मुस्लिम कलाकारों की उपस्थिति भी सांस्कृतिक समरसता का संदेश दे रही है।
महोत्सव के अगले चरण में पंडित यू. राजेश और शिवमणि की मेंडोलिन-ड्रम जुगलबंदी, पं. विश्वमोहन भट्ट और सलिल भट्ट का वीणा वादन, तबला युगलबंदी और कई दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।