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Sawan Shivratri 2026: आज सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये चीजें, जानें जलाभिषेक का शुभ समय और पूजा विधि

Sawan Shivratri 2026 आज 11 अगस्त को मनाई जा रही है। जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने का शुभ समय, निशिता काल, चार प्रहर पूजा का समय, पूजा विधि और भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली सामग्री। सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक और व्रत से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी यहां पढ़ें।
 

Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि आज यानी 11 अगस्त 2026 को मनाई जा रही है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ने वाली यह शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक के लिए विशेष मानी जाती है। देशभर के शिव मंदिरों और शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। कांवड़िए भी हर-हर महादेव के जयकारों के साथ शिवलिंग पर कांवड़ का जल अर्पित कर रहे हैं।

पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि देर रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं।

पूरे दिन कर सकते हैं जलाभिषेक, ये हैं खास मुहूर्त

11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अवसर पूरे दिन रहेगा। हालांकि, श्रद्धालु विशेष मुहूर्त में जलाभिषेक करना चाहते हैं तो इन समयों को ध्यान में रख सकते हैं-

  • पहला शुभ मुहूर्त: सुबह 6 बजे से 10 बजे तक
  • दूसरा शुभ मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 12:53 बजे तक
  • तीसरा शुभ मुहूर्त: शाम 7:04 बजे से रात 9 बजे तक
  • चौथा शुभ मुहूर्त: रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक

इनमें रात का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि शिवरात्रि की पूजा में निशिता काल का विशेष महत्व बताया गया है।

निशिता काल में पूजा का खास महत्व

सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा सुबह या शाम किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में निशिता काल को शिव पूजा के लिए विशेष माना गया है।

11 अगस्त को निशिता काल रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव का पूजन और जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है।

सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का समय

शिवरात्रि पर रात्रि के चार प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। 2026 में चार प्रहर का समय इस प्रकार बताया गया है-

पहला प्रहर: शाम 7:06 बजे से रात 9:45 बजे तक — 11 अगस्त
दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:45 बजे तक — 11 अगस्त
तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक — 12 अगस्त
चौथा प्रहर: सुबह 3:04 बजे से 5:49 बजे तक — 12 अगस्त

जो श्रद्धालु पूरी रात पूजा करना चाहते हैं, वे अपनी सुविधा और स्थानीय मंदिर के पूजा कार्यक्रम के अनुसार चारों प्रहर में भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को कई तरह की पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल और सफेद चंदन भी अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव को बेलपत्र और जल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है।

सावन शिवरात्रि की पूजा विधि

सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने के लिए सबसे पहले शिवलिंग का जल और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से विधिवत अभिषेक किया जा सकता है।

अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भस्म, भांग, सफेद फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।

अगर आपने सावन शिवरात्रि का व्रत रखा है तो व्रत कथा सुनने की भी परंपरा है। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और भोग लगाएं।

कांवड़िए भी करेंगे शिवलिंग पर जलाभिषेक

सावन शिवरात्रि के मौके पर बड़ी संख्या में कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर शिवालयों में पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित करना माना जाता है। शिवरात्रि के दिन मंदिरों में जलाभिषेक के लिए विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

Disclaimer: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दी गई ये जानकारियां आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है।