क्या होता है मलमास? आखिर क्यों इस दौरान टाल दिए जाते हैं शादी-विवाह और शुभ कार्य, जानें
हिंदू धर्म में समय को केवल दिन, महीने और वर्षों में नहीं बांटा गया है, बल्कि हर कालखंड का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी माना गया है। हिंदू पंचांग का हर महीना अपने साथ विशेष मान्यताएं और परंपराएं लेकर आता है। इन्हीं में एक खास समय होता है, जिसे मलमास, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
जैसे ही इस महीने की शुरुआत होती है, लोग विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों को टालने लगते हैं। लेकिन क्या यह महीना वास्तव में अशुभ होता है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक कारण छिपा है?
क्या होता है मलमास?
जिस चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, उसे अधिकमास कहा जाता है। यही अधिकमास आगे चलकर मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है।
हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति पर आधारित होता है। कई बार दोनों के समय चक्र में अंतर आ जाता है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त महीने को जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अधिकमास लगभग हर 32 महीने 16 दिन के अंतराल पर आता है।
मलमास के दो प्रकार
1. अधिकमास
यह सबसे सामान्य स्थिति मानी जाती है। इसमें पूरे चंद्र मास के दौरान सूर्य की कोई संक्रांति नहीं पड़ती। इसी को आमतौर पर मलमास कहा जाता है।
2. क्षयमास
यह बेहद दुर्लभ माना गया है। इसमें एक ही महीने में दो संक्रांतियां पड़ जाती हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार क्षयमास लगभग 141 वर्षों में एक बार आता है, इसलिए इसे अत्यंत विशेष माना जाता है।
क्यों नहीं किए जाते शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य?
धार्मिक ग्रंथों में मलमास को सांसारिक उत्सवों की बजाय आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित समय बताया गया है। यही वजह है कि इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को टाल दिया जाता है।
मान्यता है कि इस समय व्यक्ति को भौतिक सुखों से थोड़ा दूर रहकर भगवान की भक्ति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देना चाहिए।
मलमास में क्या करना शुभ माना जाता है?
इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना अधिक फल देते हैं।
मलमास में ये कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:
- भगवान विष्णु की पूजा और आराधना
- Bhagavad Gita और पुराणों का पाठ
- मंत्र जाप और ध्यान
- व्रत और दान-पुण्य
- जरूरतमंदों की सहायता
क्या मलमास सच में अशुभ होता है?
जिस महीने को आम लोग अक्सर अशुभ मान लेते हैं, उसी महीने को धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु का प्रिय समय बताया गया है। इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
पुराणों में उल्लेख मिलता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। यही वजह है कि संत और विद्वान इसे भक्ति और साधना का सबसे श्रेष्ठ समय मानते हैं।