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पाकिस्तान में कहाँ है होलिका दहन का उद्गम स्थल? जानें इतिहास, मान्यता और तथ्य
 

 

रंगों का त्योहार होली से एक दिन पहले होलिका दहन का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। साथ ही यह भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की दिव्य कथा को भी जीवंत करता है। इस वर्ष होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

पाकिस्तान में प्रह्लाद कुंड कहां है?

जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर में स्थित प्रह्लाद कुंड को प्रह्लादपुरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राचीन हिंदू मंदिर मुल्तान किला के अंदर एक ऊंचे मंच पर बना हुआ है। मंदिर बहाउद्दीन ज़कारिया के मकबरे के समीप स्थित है और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित माना जाता है।

धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहां भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। मान्यता है कि होलिका दहन की परंपरा की शुरुआत भी इसी पवित्र स्थल से हुई थी।

वर्तमान स्थिति

साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उपजे तनाव के दौरान इस मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा। वर्तमान में यह मंदिर खंडहर अवस्था में है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता आज भी बरकरार है।

भारत में कहां है प्रह्लाद कुंड?

भारत में उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित प्रह्लाद कुंड को पावन स्थल माना जाता है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भक्त प्रह्लाद से जुड़ा चमत्कारिक प्रसंग घटित हुआ था।

हरदोई शहर से कुछ दूरी पर स्थित यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं।

अलौकिक आस्था का केंद्र

मान्यता है कि प्रह्लाद कुंड के दर्शन मात्र से भक्तों को अलौकिक शक्ति का अनुभव होता है। यह स्थल सच्ची भक्ति और श्रद्धा की शक्ति का संदेश देता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां प्रार्थना करने से कष्टों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।