{"vars":{"id": "130921:5012"}}

नागपंचमी पर सांपों को क्यों पिलाया जाता है दूध? आखिर क्या है इसके पीछे की कहानी

 

आज यानी 17 अगस्त को नागपंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। देश के कई हिस्सों में इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। राजस्थान, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल में नागपंचमी को लेकर खास उत्साह देखने को मिलता है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने और उन्हें दूध व लावा अर्पित करने से परिवार पर सर्पदंश का खतरा टलता है और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

नागपंचमी के दिन कई जगह सपेरे टोकरी में सांप लेकर घर-घर पहुंचते हैं। लोग श्रद्धा के साथ नाग देवता को दूध और लावा चढ़ाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सांपों को दूध पिलाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है।

नागों को दूध और लावा चढ़ाने के पीछे क्या है मान्यता?

पौराणिक कथाओं में नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन सांपों को दूध और लावा अर्पित करने से सर्पदंश का भय कम होता है और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इससे जुड़ी एक कथा राजा जनमेजय के नाग यज्ञ से संबंधित है। कथा के अनुसार, पांडवों के वंशज राजा जनमेजय ने नागों का विनाश करने के लिए एक विशाल नाग यज्ञ कराया था। यज्ञ की अग्नि में नागों की कई प्रजातियां भस्म होने लगीं। इसी दौरान तक्षक नाग ने देवराज इंद्र के आसन को भी जकड़ लिया। स्थिति ऐसी बन गई कि इंद्र भी यज्ञ की अग्नि की चपेट में आने वाले थे।

कथा के अनुसार, बाद में यज्ञ को रोक दिया गया और नागों का पूरी तरह विनाश होने से बच गया। मान्यता है कि यज्ञ की अग्नि से झुलसे नागों के घावों को शांत करने के लिए उन पर दूध और लावा चढ़ाया गया। इसी घटना को नागपंचमी पर नागों को दूध और लावा अर्पित करने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

क्या सच में सांप दूध पीते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के बीच विज्ञान इस परंपरा को अलग नजरिए से देखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांप स्तनधारी जीव नहीं हैं और उनके शरीर में दूध पचाने के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं होती। सांपों का प्राकृतिक भोजन मुख्य रूप से चूहे, मेंढक, छिपकली, पक्षी और अन्य छोटे जीव होते हैं।

इसलिए सांप को जबरन दूध पिलाना उसके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई बार लंबे समय तक भूखे या प्यासे सांप को दूध पीते हुए देखा जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूध उनका प्राकृतिक आहार है।