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कार्तिक उन्नीकृष्णन की कहानी: चोट, संघर्ष और इंतजार के बाद 33 की उम्र में एशियन गेम्स डेब्यू

33 साल की उम्र में कार्तिक उन्नीकृष्णन ने पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लिया। नागोया में पुरुष ट्रिपल जंप फाइनल के दौरान बारिश और मुश्किल परिस्थितियों के बीच उन्होंने 16.02 मीटर की छलांग लगाकर छठा स्थान हासिल किया। कार्तिक का सफर चोट, कोरोना और कई असफल मौकों से होकर गुजरा है।
 

Asian Games 2026: 33 साल की उम्र में जब कई एथलीट अपने करियर के आखिरी दौर के बारे में सोचने लगते हैं, तब कार्तिक उन्नीकृष्णन ने पहली बार एशियन गेम्स के मैदान पर कदम रखा। नागोया में हुए पुरुष ट्रिपल जंप फाइनल में बारिश और मुश्किल परिस्थितियों के बीच कार्तिक ने 16.02 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और छठे स्थान पर रहे। हालांकि पदक उनके हाथ नहीं आया, लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी कहानी कई साल के संघर्ष, चोट और लगातार वापसी से जुड़ी है।

पहली बार एशियन गेम्स में उतरे कार्तिक

कार्तिक उन्नीकृष्णन का एशियन गेम्स डेब्यू किसी आसान शुरुआत जैसा नहीं था। नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में ट्रिपल जंप प्रतियोगिता के दौरान लगातार बारिश हो रही थी, जिससे रनवे पर प्रदर्शन करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। कार्तिक ने छह प्रयास किए और सिर्फ एक बार 16 मीटर का आंकड़ा पार कर सके। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 16.02 मीटर रहा, जिसके साथ उन्होंने छठा स्थान हासिल किया।

मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब भारत के प्रवीण चित्रवेल शुरुआती प्रयास के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो गए। 2022 एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता चित्रवेल एक भी वैध प्रयास दर्ज नहीं कर सके। इसके बाद ट्रिपल जंप में भारत की चुनौती मुख्य रूप से कार्तिक पर रह गई।

1993 में जन्म, केरल में बीता बचपन

कार्तिक का जन्म 1993 में हुआ था। उनके माता-पिता ऊटी में चाय की दुकान चलाते थे, जबकि उनका बचपन केरल में नाना-नानी के साथ बीता। पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी और शुरुआत में खेल भी उनके लिए आसान नहीं रहा।

पालक्काड के पारली हाई स्कूल में उन्हें पहले हर्डल्स में उतारा गया, लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में जब उन्होंने ट्रिपल जंप शुरू किया तो प्रदर्शन में कुछ सुधार आया, मगर शुरुआती दौर में वह राज्य स्तर से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।

एक समय ऐसा भी आया जब कार्तिक ने बड़े लक्ष्य देखने के बजाय सिर्फ केरल की राज्य टीम की जर्सी पहनने को अपना लक्ष्य बना लिया था।

एक मौके ने बदल दिया करियर

कार्तिक के करियर में बड़ा बदलाव तब आया जब एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वह चोटिल खिलाड़ी की जगह उतरे और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर रहे। उनके इस प्रदर्शन ने कोच पीजी मनोज का ध्यान खींचा।

कोच की सलाह थी कि पहले नौकरी सुरक्षित करो और फिर खेल पर ध्यान दो। इसके बाद कार्तिक को भारतीय वायुसेना में स्पोर्ट्स कोटे के जरिए नौकरी मिली। वायुसेना में आने के बाद उनका नजरिया बदला। पहले जहां उनका लक्ष्य 15 मीटर के आसपास था, वहीं धीरे-धीरे उन्होंने 16 और फिर 17 मीटर की दूरी पार करने का लक्ष्य बनाना शुरू किया।

चोट और कोरोना ने भी रोकी राह

कार्तिक के करियर में कई बार ऐसा आया जब वह बड़ी प्रतियोगिताओं के करीब पहुंचकर रुक गए। कोरोना महामारी के दौरान वह पटियाला में फंस गए। इसके बाद रिकवरी और कोच की गैरमौजूदगी के कारण टोक्यो ओलंपिक ट्रायल्स में भी उन्हें नुकसान हुआ।

कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल के दौरान टखने की चोट ने भी उनकी राह रोक दी। इससे कुछ समय पहले ही वह 17 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले भारतीय एथलीटों के क्लब में शामिल हुए थे।

2023 में गंभीर टेंडन इंजरी ने उनकी तकनीक और मांसपेशियों के तालमेल को बुरी तरह प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने अपनी फिजियो और अब पत्नी गरिमा के साथ मिलकर अपनी जंपिंग तकनीक को लगभग नए सिरे से तैयार किया।

एशियन गेम्स में पदक से चूके, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती

नागोया में कार्तिक के पास छह प्रयास थे और उन्हें उम्मीद थी कि वह करीब 16.80 मीटर की छलांग लगा सकते हैं। लेकिन बारिश और परिस्थितियों के बीच उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 16.02 मीटर ही रहा और वह छठे स्थान पर रहे।

पुरुष ट्रिपल जंप में चीन के वेन सु ने 17.42 मीटर की छलांग के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। जापान के मनातो मियाओ ने 16.77 मीटर के साथ रजत और चीन के मा यिंगलोंग ने 16.75 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।

कार्तिक के लिए यह परिणाम भले ही पदक में नहीं बदला, लेकिन 33 साल की उम्र में एशियन गेम्स के मंच तक पहुंचना उनके लंबे सफर का अहम पड़ाव रहा। बारिश, चोट और लगातार छूटते मौकों के बावजूद उन्होंने बड़े मंच तक पहुंचने का रास्ता नहीं छोड़ा।