फर्जी चोट से लेकर रेफरी विवाद तक... FIFA World Cup में क्या-क्या नहीं कर सकते खिलाड़ी?
FIFA World Cup Rules: फुटबॉल विश्व कप सिर्फ खिलाड़ियों की प्रतिभा का मंच नहीं, बल्कि अनुशासन और नियमों की भी सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को मैदान के अंदर और बाहर बेहद सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। सोशल मीडिया गतिविधियों से लेकर मैच के दौरान व्यवहार तक, हर पहलू पर फीफा की कड़ी निगरानी रहती है।
नियमों का उल्लंघन करने पर खिलाड़ियों को रेड कार्ड, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं विश्व कप में खिलाड़ियों के लिए लागू कुछ महत्वपूर्ण नियमों के बारे में।
सब्सटिट्यूट होने पर 10 सेकंड में छोड़ना होगा मैदान
फीफा के नियमों के अनुसार यदि किसी खिलाड़ी को बदला जाता है तो उसे 10 सेकंड के भीतर मैदान से बाहर जाना होगा।
यदि कोई खिलाड़ी जानबूझकर समय बर्बाद करने के उद्देश्य से मैदान छोड़ने में देरी करता है, तो उसकी जगह आने वाला खिलाड़ी एक मिनट तक मैदान में प्रवेश नहीं कर सकेगा। ऐसे में टीम को कुछ समय तक एक खिलाड़ी कम के साथ खेलना पड़ सकता है। फीफा का मानना है कि यह नियम मैच के दौरान अनावश्यक समय बर्बाद करने की प्रवृत्ति को रोकने में मदद करेगा।
फर्जी चोट का बहाना पड़ सकता है भारी
विश्व कप के दौरान खिलाड़ियों को चोट का बहाना बनाकर खेल रोकने की रणनीति अपनाने से भी बचना होगा। यदि किसी खिलाड़ी की चोट के कारण डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ को मैदान में बुलाना पड़ता है, तो उपचार के बाद भी वह खिलाड़ी खेल दोबारा शुरू होने के कम से कम एक मिनट तक मैदान में वापस नहीं लौट सकेगा।
इस दौरान संबंधित टीम को एक खिलाड़ी कम के साथ खेलना होगा। फीफा का उद्देश्य मामूली चोट का बहाना बनाकर मैच की गति धीमी करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
रेफरी के फैसले का विरोध करने पर होगी कार्रवाई
फीफा ने रेफरी के फैसलों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। कोई खिलाड़ी या कोच रेफरी के निर्णय के विरोध में मैदान छोड़कर नहीं जा सकता। ऐसा करने पर रेड कार्ड दिखाया जा सकता है। गंभीर मामलों में मैच का परिणाम भी प्रभावित हो सकता है और दूसरी टीम के पक्ष में फैसला दिया जा सकता है। खिलाड़ियों को मैदान पर संयम और खेल भावना बनाए रखने की सलाह दी गई है।
हर हरकत पर रहेगी VAR और कैमरों की नजर
विश्व कप में खिलाड़ियों की हर गतिविधि पर वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) और दर्जनों हाई-टेक कैमरों की नजर रहेगी। गोल, पेनाल्टी, सीधे रेड कार्ड और खिलाड़ी की पहचान से जुड़े विवादित मामलों में वीडियो फुटेज के आधार पर फैसले बदले जा सकते हैं।
ऐसे में खिलाड़ियों को अनुशासनहीनता, आक्रामक व्यवहार और नियमों के उल्लंघन से बचना होगा, क्योंकि मैदान पर उनकी हर हरकत रिकॉर्ड की जाएगी।
डोपिंग पर फीफा की जीरो टॉलरेंस नीति
विश्व कप के दौरान एंटी-डोपिंग नियमों को भी बेहद सख्ती से लागू किया जाएगा। खिलाड़ियों को किसी भी समय रैंडम ड्रग टेस्ट के लिए बुलाया जा सकता है। यह टेस्ट मैच के दौरान, ट्रेनिंग सत्र में या होटल में ठहरने के समय भी किया जा सकता है। फीफा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टूर्नामेंट पूरी तरह निष्पक्ष और प्रतिबंधित पदार्थों से मुक्त रहे।
नियम तोड़ने पर रेड कार्ड से लेकर बैन तक का खतरा
फीफा अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैदान पर समय बर्बाद करना, फर्जी चोट का सहारा लेना, रेफरी के फैसले का विरोध करना या डोपिंग नियमों का उल्लंघन करना खिलाड़ियों के लिए भारी पड़ सकता है। नियमों के उल्लंघन पर रेड कार्ड, मैच प्रतिबंध और लंबे समय के लिए निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
विश्व कप में सफलता सिर्फ बेहतरीन प्रदर्शन से नहीं, बल्कि नियमों और खेल भावना का सम्मान करने से भी तय होती है।