पीरियड्स के दर्द में जीता सिल्वर... अब DSP बनीं ज्ञानेश्वरी यादव, CM ने दिया 30 लाख का इनाम
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाली छत्तीसगढ़ की भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 30 लाख रुपये का इनाम और DSP पद पर प्रमोशन देने की घोषणा की। जानिए संघर्ष, पिता का सपना और एशियन गेम्स को लेकर उनका अगला लक्ष्य।
Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए रजत पदक जीतकर इतिहास रचने वाली छत्तीसगढ़ की स्टार भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव को राज्य सरकार ने बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने सरकारी आवास पर उनका सम्मान करते हुए 30 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और पुलिस विभाग में डीएसपी (DSP) पद पर प्रमोशन देने की घोषणा की। वर्तमान में ज्ञानेश्वरी राजनांदगांव जिले में एएसआई (सहायक उपनिरीक्षक) के पद पर कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा- ज्ञानेश्वरी ने पूरे छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी यादव को कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, कठिन परिश्रम और समर्पण के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी यह सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी। राज्य सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि वे भविष्य में ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे बड़े मंचों पर भारत का गौरव बढ़ा सकें।
53 किलोग्राम वर्ग में जीता सिल्वर मेडल
ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 53 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में ज्ञानेश्वरी यादव ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उनके इस प्रदर्शन ने भारत के पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया और छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
पिता का सपना किया पूरा
अपनी सफलता पर भावुक हुईं ज्ञानेश्वरी ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने में उनके पिता की सबसे बड़ी भूमिका रही। उन्होंने बताया कि उनके पिता खुद बॉडीबिल्डिंग करते थे और बचपन में रोज उन्हें साइकिल पर बैठाकर जिम ले जाया करते थे।
ज्ञानेश्वरी ने कहा कि उनके पिता का सपना था कि वह वह उपलब्धि हासिल करें, जो वे खुद नहीं कर सके। आज का यह पदक उसी सपने को पूरा करने की दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पीरियड्स के पहले दिन भी नहीं मानी हार
ज्ञानेश्वरी ने अपनी जीत के पीछे छिपे संघर्ष का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि फाइनल मुकाबले वाले दिन उनके पीरियड्स का पहला दिन था और उन्हें तेज दर्द हो रहा था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पूरी एकाग्रता के साथ सभी लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी के लिए मानसिक मजबूती उतनी ही जरूरी होती है जितनी शारीरिक फिटनेस।
DSP बनने की खुशी, अब एशियन गेम्स पर नजर
डीएसपी पद पर प्रमोशन की घोषणा से ज्ञानेश्वरी बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देगा।
ज्ञानेश्वरी ने बताया कि अब उनका पूरा ध्यान एक महीने बाद होने वाले एशियन गेम्स पर है। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ में रजत जीतने के बाद अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में पदक जीतकर देश का नाम और ऊंचा करना है।
खिलाड़ियों के लिए बड़ा संदेश
ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल भी है। राज्य सरकार की ओर से मिला सम्मान इस बात का संकेत है कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अब केवल तालियां ही नहीं, बल्कि करियर और भविष्य दोनों में मजबूत समर्थन भी मिल रहा है।