नीरज चोपड़ा के बाद भारत का अगला Javelin Star? 87.68 मीटर फेंककर चमके रोहित यादव, अब 90m पर नजर
Rohit Yadav Javelin Throw: भारतीय जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा के बाद जिस नाम की चर्चा तेजी से बढ़ रही है, वह है रोहित यादव। 25 वर्षीय रोहित ने 2026 में लगातार शानदार प्रदर्शन कर खुद को भारत के शीर्ष भाला फेंक खिलाड़ियों में स्थापित किया है। हाल ही में भुवनेश्वर में 87.68 मीटर का थ्रो करने के बाद वह भारतीय जैवलिन में नीरज चोपड़ा के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। अब उनकी नजर सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर नहीं, बल्कि बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने पर है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में निराशा, फिर किया जोरदार कमबैक
रोहित यादव के लिए 2026 का कॉमनवेल्थ गेम्स अभियान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ग्लासगो में पुरुषों की जैवलिन फाइनल में उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 81.56 मीटर रहा और वह 12 खिलाड़ियों में सातवें स्थान पर रहे। खास बात यह थी कि कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले ही रोहित 87.05 मीटर का शानदार थ्रो कर चुके थे।
उनका यह प्रदर्शन उन्हें खुद भी परेशान करता रहा। नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो में 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर और यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के साथ ब्रॉन्ज जीता था। ऐसे में रोहित का अपने पहले के प्रदर्शन से काफी पीछे रह जाना उनके लिए निराशाजनक था।
लेकिन रोहित ने ज्यादा समय तक इस निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया। कुछ ही सप्ताह बाद उन्होंने भुवनेश्वर में 87.68 मीटर का थ्रो कर जोरदार वापसी की। इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय जैवलिन खिलाड़ियों की सूची में नीरज चोपड़ा के बाद दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया।
87.68 मीटर के बाद भी क्यों खुश नहीं हैं रोहित?
इतना शानदार थ्रो करने के बावजूद रोहित इस प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि असली सफलता बड़े मंच पर प्रदर्शन करने से मिलेगी।
रोहित के लिए एशियन गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मुकाबले ज्यादा मायने रखते हैं। वह सिर्फ व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
क्या रोहित 90 मीटर का आंकड़ा छू सकते हैं?
जैवलिन थ्रो में 90 मीटर का आंकड़ा बेहद खास माना जाता है। अब तक दुनिया में सिर्फ 28 खिलाड़ी 90 मीटर की दूरी पार कर पाए हैं। नीरज चोपड़ा ने भी 2025 में दोहा डायमंड लीग में 90.23 मीटर का थ्रो कर यह उपलब्धि हासिल की थी और वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने थे।
रोहित ने 2026 में दो बार 87 मीटर से ज्यादा की दूरी तय की है। ऐसे में उनके 90 मीटर तक पहुंचने की चर्चा शुरू होना स्वाभाविक है।
रोहित के पूर्व कोच माइकल मुसलमैन भी मानते हैं कि उनके. शरीर में 90 मीटर तक थ्रो करने की क्षमता है। उनके मुताबिक रोहित में प्राकृतिक तौर पर मजबूत हाथ है और वह रन-अप, शरीर के रोटेशन और रिलीज का अच्छा इस्तेमाल करते हैं।
बांस की लकड़ी से शुरू हुआ था जैवलिन का सफर
रोहित यादव की कहानी किसी बड़े ट्रेनिंग सेंटर से शुरू नहीं हुई थी। जैवलिन से उनका रिश्ता बचपन में ही बन गया था।
साल 2012 में जब रोहित पांचवीं कक्षा में थे, उनके पिता सभाजी यादव, जो राज्य स्तर के डेकाथलीट रह चुके हैं, एक दिन घर पर बांस की एक डंडी लेकर आए। उसका आकार भाले जैसा था। पिता ने जब उसे फेंककर दिखाया तो वह जमीन पर लेटने के बजाय सीधी खड़ी हो गई। इस घटना ने 11 साल के रोहित को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने जैवलिन थ्रो को अपना लिया।
शुरुआत में वह गांव में ही अभ्यास करते थे। बाद में माइकल मुसलमैन ने उन्हें ऑनलाइन ट्रेनिंग दी। दो साल की कोचिंग के दौरान रोहित ने 81.75 मीटर का भारतीय यूथ रिकॉर्ड बनाया, जो अब भी कायम बताया जाता है। वह अंडर-20 स्तर पर 78.99 मीटर के प्रदर्शन के साथ दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी भी बने।
चोट ने रोकी रफ्तार, लेकिन रोहित ने नहीं मानी हार
यूथ स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद रोहित का सीनियर स्तर तक पहुंचने का सफर उतना आसान नहीं रहा। उन्हें कोहनी में चोट लगी और सर्जरी भी करानी पड़ी। इस वजह से उनकी प्रगति प्रभावित हुई।
2023 और 2025 में वह 83-84 मीटर के आसपास थ्रो कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपनी तकनीक पर काम किया और एल्बो डिलीवरी में बदलाव किया। रोहित के मुताबिक, पहले वह ज्यादा रिदम के साथ थ्रो करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी ताकत और रिदम दोनों को साथ इस्तेमाल करना शुरू किया। इससे उनके प्रदर्शन में करीब चार मीटर का सुधार आया।
तकनीक में अभी भी सुधार की गुंजाइश
रोहित की रन-अप स्पीड और रिलीज को उनकी ताकत माना जाता है, लेकिन उनके पूर्व कोच माइकल मुसलमैन के मुताबिक अभी तकनीक में कुछ सुधार की जरूरत है। खास तौर पर फ्रंट लेग ब्लॉक को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है।
रोहित भी मानते हैं कि उनका फ्रंट ब्रेस अभी पूरी तरह सही नहीं है। उनका मानना है कि अगर वह इस हिस्से को सुधार लेते हैं तो अपने प्रदर्शन में करीब दो मीटर तक का सुधार कर सकते हैं।
एशियन गेम्स में अब बड़ी चुनौती
अब रोहित के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2026 एशियन गेम्स है। नीरज चोपड़ा के चोट के कारण इस प्रतियोगिता से बाहर होने के बाद जैवलिन में भारत की उम्मीदें काफी हद तक रोहित पर टिकी हैं। नीरज चोपड़ा ने 2026 का बाकी सीजन टखने में लिगामेंट चोट के कारण खत्म कर दिया है।
एशियन गेम्स में रोहित की बड़ी चुनौती श्रीलंका के रुमेश पथिराज होंगे। दोनों खिलाड़ी प्रतियोगिताओं के दौरान अच्छे दोस्त भी बन चुके हैं। रुमेश ने ग्लासगो में रोहित को तेज और सपाट थ्रो करने की सलाह दी थी। बाद में ट्रेनिंग को लेकर दोनों के बीच हुई बातचीत से रोहित को अपनी तैयारी में कुछ बदलाव करने की प्रेरणा मिली।
रुमेश ने रोहित को बताया था कि वह ज्यादा वजन उठाने के बजाय रिदम और रनिंग स्पीड पर काम करते हैं। इसके बाद रोहित ने अपनी ट्रेनिंग में बदलाव किया और अपने वजन को करीब 20 प्रतिशत कम किया। इसके बाद ही उन्होंने 87.68 मीटर का अपना सबसे बड़ा थ्रो किया।
नजर एशियन गेम्स से आगे, लक्ष्य लॉस एंजिल्स 2028
रोहित के लिए फिलहाल 90 मीटर का आंकड़ा प्राथमिकता नहीं है। वह पहले बड़े मंच पर पदक जीतना चाहते हैं। हालांकि उनके पूर्व कोच को भरोसा है कि रोहित आने वाले समय में 90 मीटर का आंकड़ा पार कर सकते हैं।
रोहित अभी 25 साल के हैं और उनके पास आगे बढ़ने के लिए काफी समय है। ऐसे में लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 उनके करियर का बड़ा लक्ष्य बन सकता है। उनके प्रदर्शन में जिस तरह का सुधार 2026 में देखने को मिला है, उससे भारतीय जैवलिन में नीरज के बाद एक नए सितारे की उम्मीद मजबूत हुई है।
फिलहाल रोहित के लिए सबसे जरूरी है कि वह ग्लासगो की निराशा को पीछे छोड़कर अपने 87.68 मीटर वाले प्रदर्शन को बड़े मंच पर दोहराएं। अगर वह ऐसा करने में सफल रहे तो एशियन गेम्स में भारत को जैवलिन से एक और बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।