दो साल की उम्र में पोलियो, घर बेचना पड़ा.. फिर भी नहीं टूटा हौसला, कौन हैं शर्मिला धनखड़? जिसने 20 साल बाद भारत को पैरा एथलेटिक्स में दिलाया गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा शॉट पुट F57 वर्ग में गोल्ड जीतने वाली शर्मिला धनखड़ की संघर्षभरी कहानी प्रेरणादायक है। पोलियो, गरीबी, घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी जैसी मुश्किलों का सामना करने के बाद उन्होंने भारत को 20 साल बाद पैरा एथलेटिक्स में ऐतिहासिक गोल्ड दिलाया।
Sharmila Dhankhar Biography: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए सबसे प्रेरणादायक कहानी हरियाणा की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने लिखी। उन्होंने महिलाओं की पैरा शॉट पुट (F57) स्पर्धा में 9.81 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह इस सीजन का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस जीत के साथ उन्होंने 20 साल बाद पैरा एथलेटिक्स में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला गोल्ड मेडल दिलाकर नया इतिहास रच दिया।
हरियाणा के छोटे गांव से शुरू हुआ संघर्ष
शर्मिला धनखड़ हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली हैं। उनका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। महज दो साल की उम्र में पोलियो होने से उनका एक पैर प्रभावित हो गया। पिता छोटे किसान थे और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। मां की आंखों की रोशनी भी नहीं थी, इसलिए इलाज ठीक से नहीं हो सका।
कम उम्र में शादी, फिर घरेलू हिंसा का सामना
कम उम्र में ही शर्मिला की शादी कर दी गई। शादी के बाद भी उनकी जिंदगी आसान नहीं हुई। दहेज की मांग को लेकर उन्हें लंबे समय तक प्रताड़ित किया गया और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। जब वह 26 साल की थीं और उनकी दो बेटियां थीं, तब उनके पहले पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। इसके बाद वह बच्चों के साथ अपने मायके लौट आईं।
दूसरी शादी ने बदली जिंदगी
पहली शादी की मुश्किलों के बाद शर्मिला ने 28 साल की उम्र में अजीत से दूसरी शादी की। उनके दूसरे पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया और खेलों में आगे बढ़ने के लिए लगातार हौसला बढ़ाया। यही साथ उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा बना।
34 साल की उम्र में शुरू किया खेल का सफर
शर्मिला ने 34 वर्ष की उम्र में शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की। उन्होंने अपने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में व्हीलचेयर श्रेणी F57 में अभ्यास शुरू किया। उम्र और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा।
ट्रेनिंग के लिए बेचना पड़ा घर
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए आर्थिक संसाधनों की जरूरत थी, लेकिन परिवार की स्थिति कमजोर थी। बताया जाता है कि 2023 में ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने के लिए शर्मिला ने अपना घर तक बेच दिया और किराए के मकान में रहने लगीं। उन्होंने आर्थिक परेशानियों को कभी अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया।
हार नहीं मानी, मेहनत जारी रखी
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में शर्मिला पदक से चूक गई थीं और चौथे स्थान पर रहीं। यह उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और एशियन पैरा गेम्स 2023 में शानदार प्रदर्शन किया। दुबई फज्जा इंटरनेशनल प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीता। इससे पहले 2021 की नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया था।
अब पूरे देश की प्रेरणा बनीं शर्मिला
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 9.81 मीटर का थ्रो कर गोल्ड जीतने के बाद शर्मिला धनखड़ सिर्फ एक चैंपियन खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। पोलियो, गरीबी, घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी जैसी चुनौतियों को पीछे छोड़कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई मुश्किल बड़ी नहीं होती। उनकी यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।