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युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास! Norway Chess जीतने वाले बने पहले भारतीय 

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने इतिहास रचते हुए Norway Chess 2026 का खिताब जीत लिया। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। प्रज्ञानानंदा ने अंतिम दौर में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर खिताब अपने नाम किया और मैग्नस कार्लसन के घरेलू मैदान पर नया इतिहास लिख दिया।
 

भारतीय शतरंज के लिए 6 जून 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने इतिहास रचते हुए प्रतिष्ठित Norway Chess 2026 का खिताब जीत लिया। इसके साथ ही वह इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।

20 वर्षीय चेन्नई के इस खिलाड़ी ने अंतिम और निर्णायक दौर में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर खिताब अपने नाम किया। क्लासिकल मुकाबले में मिली जीत के साथ उन्हें तीन महत्वपूर्ण अंक मिले और उन्होंने कुल 18 अंक हासिल कर टूर्नामेंट जीत लिया।

आखिरी दौर में पलटा पूरा खेल

Norway Chess 2026 का खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। अंतिम राउंड से पहले अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो बढ़त पर थे, जबकि प्रज्ञानानंदा तीसरे स्थान पर मौजूद थे।

हालांकि अंतिम मुकाबले में प्रज्ञानानंदा ने कीमर को हराकर पूरे तीन अंक हासिल किए। दूसरी ओर वेस्ली सो, अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ क्लासिकल मुकाबला नहीं जीत सके और आर्मागेडन टाईब्रेक जीतने के बावजूद कुल 17 अंकों तक ही पहुंच पाए। इसी के साथ प्रज्ञानानंदा 18 अंकों के साथ चैंपियन बन गए।

छठे स्थान से चैंपियन बनने तक का सफर

इस जीत को और खास बनाती है प्रज्ञानानंदा की शानदार वापसी। टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं था। छठे राउंड के बाद वह तालिका में अंतिम स्थान पर थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने ऐसा कमबैक किया जिसे शतरंज प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे। उन्होंने लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीते और अंतिम दौर तक पहुंचते-पहुंचते पूरे टूर्नामेंट का समीकरण बदल दिया।

मैग्नस कार्लसन को दो बार हराकर बढ़ाया आत्मविश्वास

Norway Chess 2026 के दौरान प्रज्ञानानंदा ने सबसे बड़ी उपलब्धि तब हासिल की जब उन्होंने दुनिया के पूर्व नंबर-1 और सात बार के Norway Chess चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार मात दी।

कार्लसन के घरेलू मैदान पर उन्हें दो बार हराना और फिर खिताब जीतना भारतीय खिलाड़ी की असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रज्ञानानंदा पूरे टूर्नामेंट में कार्लसन के खिलाफ सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे।

विश्व चैंपियन गुकेश रहे पीछे

भारत के मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का हिस्सा थे, लेकिन वह खिताबी दौड़ में पीछे रह गए। टूर्नामेंट के अंतिम चरण में उनके बाहर होने के बाद भारतीय उम्मीदों का पूरा भार प्रज्ञानानंदा पर आ गया था। युवा ग्रैंडमास्टर ने उस भरोसे को कायम रखते हुए खिताब भारत के नाम कर दिया।

विश्वनाथन आनंद भी नहीं कर पाए थे यह कारनामा

Norway Chess दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शतरंज टूर्नामेंटों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी और अब तक कोई भी भारतीय खिलाड़ी इस खिताब को नहीं जीत सका था।

प्रज्ञानानंदा ने यह उपलब्धि हासिल कर न केवल नया इतिहास रचा, बल्कि वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन गए। यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश जैसे खिलाड़ियों से भी आगे निकलने वाली उपलब्धि मानी जा रही है।

भारतीय शतरंज के लिए ऐतिहासिक पल

Norway Chess 2026 का खिताब जीतकर प्रज्ञानानंदा ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय शतरंज का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। मैग्नस कार्लसन के घरेलू मैदान पर जीत हासिल करना, उन्हें दो बार हराना और फिर ट्रॉफी अपने नाम करना भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गया है। 20 वर्षीय प्रज्ञानानंदा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और विश्व शतरंज में भारत की बढ़ती ताकत का बड़ा संदेश भी देगी।