यूपी में कृषि को मिला तकनीक का सहारा, 156 स्टार्टअप्स से किसानों को क्रेडिट और डिजिटल सेवाएं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और संस्थागत समर्थन से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 156 पंजीकृत कृषि स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो किसानों को क्रेडिट सुविधा, सलाहकार सेवाएं और डिजिटल समाधान उपलब्ध करा रहे हैं। इन पहलों से योगी आदित्यनाथ सरकार में खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार हुआ है।
प्रदेश सरकार ने कृषि को परंपरागत ढांचे से बाहर निकालकर तकनीक आधारित मॉडल से जोड़ने पर जोर दिया है। स्टार्टअप्स के माध्यम से किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने, फसल प्रबंधन संबंधी परामर्श देने और बाजार से सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिल रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की निर्भरता पारंपरिक साहूकारी व्यवस्था पर कम हुई है तथा उन्हें पारदर्शी वित्तीय सेवाएं मिल रही हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना की पहुंच को आसान बनाया है। मौसम पूर्वानुमान, फसल चयन, बीज और उर्वरक संबंधी सलाह अब मोबाइल एप और कॉल सेंटर के माध्यम से उपलब्ध हो रही है। इससे उत्पादन लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि की संभावना बढ़ी है। प्रदेश सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित हस्तक्षेप से कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी।
सरकार की स्टार्टअप नीति, निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं और कृषि को आधुनिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी कदम आगे बढ़े हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश को एग्री इनोवेशन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर कार्य जारी है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि क्रेडिट, बाजार संपर्क और तकनीकी परामर्श की यह श्रृंखला मजबूत होती रही तो उत्तर प्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि जोखिम कम करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। 156 कृषि स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी को इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।