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सहारनपुर में मस्जिद के मलबे के नीचे मिला 20 फीट गहरा कुआं, ASI करेगी जांच

 

सहारनपुर में मस्जिद ढहाए जाने के बाद अब उसके नीचे मिले कुएं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को करीब 16 घंटे तक चली बुलडोजर कार्रवाई के बाद रविवार सुबह जब मलबा हटाया गया तो जमीन के नीचे करीब 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा कुआं दिखाई दिया। कुएं को पत्थर के स्लैब से ढका गया था।

प्रशासन के मुताबिक, स्लैब को कटर से काटकर हटाया गया, जिसके बाद कुआं सामने आया। फिलहाल पुलिस ने कुएं को लोहे की चादर से ढक दिया है, ताकि मलबा या अन्य सामग्री उसके अंदर न गिरे। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।

कुआं कितना पुराना, अब ASI करेगी जांच

कुएं के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह आखिर कितना पुराना है और यहां कब से मौजूद है। इसकी उम्र और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को मौके पर बुलाया है। जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कुआं किस दौर का है और इसका इस्तेमाल कब से होता रहा है।

मस्जिद निर्माण को लेकर शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया है कि इस जगह पर पहले मंदिर रहा होगा और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, मंदिर होने का यह दावा अभी जांच का विषय है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मस्जिद गिराने पर भी सियासत तेज

मस्जिद ढहाए जाने के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सांसद चंद्रशेखर ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस लड़ाई को सदन, कोर्ट और सड़क, तीनों जगह लड़ा जाएगा। उन्होंने पूछा कि मस्जिद गिराने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई।

वहीं, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए लिखा कि क्या वह सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे। उनके इस बयान के बाद भी राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।

कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई- प्रशासन
प्रशासन का कहना है कि मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद गिराया गया। शनिवार को करीब 16 घंटे तक बुलडोजर कार्रवाई चली और रविवार सुबह तक मलबा हटाने का काम पूरा किया गया।

हालांकि, मस्जिद पक्ष का आरोप है कि उसे हाईकोर्ट में अपील करने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। मस्जिद पक्ष के वकील बाबर वसीम ने कहा है कि कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा।

मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे
मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मुस्लिम धर्मगुरुओं और मस्जिद पक्ष का कहना है कि मस्जिद करीब 100 साल पुरानी थी। वहीं, इससे पहले इसे करीब 70 साल पुराना बताया गया था।

प्रशासन के अनुसार, वक्फ से जुड़े दस्तावेजों में मस्जिद की उम्र करीब 70 साल दर्ज है। अब कुएं के सामने आने के बाद उसकी उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर भी जांच की जा रही है।