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लो डिमांड के नाम पर 5000 मेगावाट उत्पादन ठप, 24 घंटे बिजली आपूर्ति पर उठे सवाल

 

प्रदेश में इन दिनों करीब 5000 मेगावाट क्षमता की बिजली उत्पादन इकाइयां बंद पड़ी हैं। इकाइयों को बंद करने के पीछे बिजली की कम मांग (लो डिमांड) को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। हालांकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल 22 उत्पादन इकाइयां रिवर्स शटडाउन (आरएसडी), प्लांड शटडाउन (एओएच) और अन्य तकनीकी कारणों से बंद हैं, जिनमें से कुछ मरम्मत कार्य के चलते ठप हैं।

इस स्थिति पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कड़ा सवाल उठाया है। परिषद का कहना है कि जब उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है, तब कम मांग का हवाला देकर उत्पादन इकाइयों को बंद करना तर्कसंगत नहीं है।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर उपभोक्ता से फिक्स चार्ज वसूला जाता है। केंद्रीय उपभोक्ता अधिकार नियमावली 2020 की धारा 10 के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को 24 घंटे बिजली पाने का अधिकार है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे आपूर्ति का रोस्टर लागू है, जबकि जमीनी हकीकत में उपभोक्ताओं को महज 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है।

उन्होंने कहा कि जब वर्तमान में मांग कम है तो सभी उत्पादन इकाइयों को संचालित कर ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी 24 घंटे बिजली देने का प्रयास किया जाना चाहिए था। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो उपभोक्ता हित में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी ऊर्जा प्रबंधन पर होगी।

ये इकाइयां हैं बंद

राज्य विद्युत उत्पादन निगम की अनपरा, हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा सी और परीछा इकाइयां बंद हैं। इसके अलावा टांडा थर्मल पावर स्टेशन की चारों इकाइयां भी ठप पड़ी हैं।