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कभी आजम खान ने कहा था 'तनखैय्या', अब उसी IAS के हाथ में जौहर यूनिवर्सिटी का भविष्य!

रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। 38 इमारतों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। अब अपील की सुनवाई RDA अध्यक्ष और मंडलायुक्त आन्जनेय सिंह के सामने हो सकती है, जिन्हें कभी आजम खान ने 'तनखैय्या' कहा था।
 

Jauhar University Demolition: उत्तर प्रदेश की चर्चित जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गर्मा गया है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यदि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ अपील करता है, तो उसकी सुनवाई उस अधिकारी के समक्ष हो सकती है, जिन्हें समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने वर्ष 2019 में सार्वजनिक मंच से 'तनखैय्या' कहकर निशाना बनाया था।

अब RDA अध्यक्ष के रूप में आन्जनेय सिंह के सामने पहुंचेगा मामला

वर्तमान में आईएएस आन्जनेय सिंह मुरादाबाद मंडल के आयुक्त होने के साथ-साथ रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अध्यक्ष भी हैं। जौहर यूनिवर्सिटी को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ यदि अपील दायर की जाती है, तो नियमानुसार इसकी सुनवाई RDA अध्यक्ष के रूप में उनके समक्ष होगी। ऐसे में यूनिवर्सिटी का भविष्य काफी हद तक प्रशासनिक प्रक्रिया और उनके फैसले पर निर्भर माना जा रहा है।

38 भवनों पर कार्रवाई का खतरा

रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की संभावना जताई गई है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भवनों के निर्माण से जुड़े नियमों और स्वीकृतियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक हलचल भी हुई तेज

ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने रामपुर पहुंचकर जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए प्रयास करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह हिंदू और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और इस मामले में व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी यूनिवर्सिटी को जारी नोटिस को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

2019 का विवाद फिर चर्चा में

वर्ष 2019 में जब आन्जनेय सिंह रामपुर के जिलाधिकारी थे, तब आजम खान ने सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्हें 'तनखैय्या' कहकर संबोधित किया था। उस समय यह बयान काफी विवादों में रहा था। अब वर्षों बाद वही अधिकारी ऐसी संवेदनशील प्रशासनिक भूमिका में हैं, जहां जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े अहम निर्णय पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आजम खान के सामने क्या हैं कानूनी विकल्प?

जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन के पास फिलहाल तीन प्रमुख विकल्प मौजूद हैं

1. कंपाउंडिंग के जरिए नक्शे नियमित कराना

रामपुर विकास प्राधिकरण से भवनों के नक्शों को कंपाउंडिंग प्रक्रिया के माध्यम से नियमित कराया जा सकता है। इसके लिए विकास शुल्क, कंपाउंडिंग फीस, लेबर सेस और अन्य निर्धारित शुल्क जमा करने होंगे। जानकारों का अनुमान है कि इस प्रक्रिया में 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आ सकता है, हालांकि यह कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

2. हाईकोर्ट की शरण लेना

यूनिवर्सिटी प्रबंधन ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकता है। हालांकि भवनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया अंततः विकास प्राधिकरण के माध्यम से ही पूरी करनी होगी।

3. RDA अध्यक्ष से कार्रवाई पर रोक की मांग

तीसरा विकल्प यह है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन मंडलायुक्त एवं RDA अध्यक्ष आन्जनेय सिंह के समक्ष आवेदन देकर ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने या पुनर्विचार की मांग करे।

सबकी नजर अगले प्रशासनिक फैसले पर

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर अब राजनीतिक, कानूनी और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाता है और रामपुर विकास प्राधिकरण इस पूरे मामले में क्या फैसला करता है। फिलहाल, इस बहुचर्चित मामले पर प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं।