सपा पर बरसे CM योगी, बोले– ‘किसान को वोट बैंक समझा गया, अब यूपी बना रेवेन्यू सरप्लस राज्य’
लखनऊ। विधानसभा सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा के लोग गाजी के मेले का समर्थन करते हैं, जो भारत की संस्कृति को रौंदने आया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराज सुहेलदेव के नाम पर राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय की स्थापना की है, जबकि विपक्ष राम मंदिर और काशी विश्वनाथ जैसे आस्था के केंद्रों का विरोध करता रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि सपा को भारत की आस्था और संस्कृति का सम्मान नहीं है। उन्होंने बताया कि संभल, बरेली, बौद्ध तीर्थ स्थलों, प्रयागराज, काशी और मथुरा समेत प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थों का तेजी से विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की पहचान देव दीपावली जैसे भव्य आयोजनों से हो रही है।
किसान को सिर्फ वोट बैंक समझा गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ कहकर मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन आज प्रदेश देश की जीडीपी में 9.5 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी है और पिछले साढ़े आठ वर्षों में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, बल्कि टैक्स चोरी पर रोक लगाई गई है। आज प्रदेश रेवेन्यू सरप्लस की स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि 2017 से पहले कृषि के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी और किसान को सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखा जाता था। अब लागत कम और उत्पादन ज्यादा हो रहा है। सरकार की योजनाओं का पैसा डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में पहुंच रहा है।
सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उत्तर प्रदेश के किसानों को दी गई है। प्रदेश में 7,727 गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें हजारों गोवंश संरक्षित हैं। गन्ना किसानों को 3.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
96 लाख युवाओं को रोजगार का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के माध्यम से उत्पादकों को बाजार से जोड़ा गया है। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के जरिए 96 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुले हैं। उन्होंने कहा कि जो सरकार अपने हस्तशिल्पियों का सम्मान नहीं करती, उसका हाल सपा जैसा होता है।
निवेश को लेकर उन्होंने कहा कि सुरक्षा, सुविधा और स्पष्ट नीति—ये तीनों शर्तें उत्तर प्रदेश में पूरी की गई हैं। डबल इंजन सरकार के कारण विकास कार्यों में तेजी आई है। 2017 से पहले जहां प्रदेश में 14 हजार कारखाने थे, वहीं अब इनकी संख्या 31 हजार के पार पहुंच गई है।