अधिवक्ताओं को CM योगी का बड़ा तोहफा! कल्याण निधि 1.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख, कैशलेस इलाज का ऐलान
प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाईकोर्ट और जनपद न्यायालयों के अधिवक्ताओं के कल्याण को लेकर बड़ा ऐलान किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की घोषणा की। इसके साथ ही अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए हाईकोर्ट की ओर से जो भी प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसमें पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे केवल व्यावसायिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका की मजबूती और आम जनता में न्याय के प्रति भरोसा बढ़ाने की दिशा में भी कार्य करें।
400 विधि अधिकारियों को मिलेगा टैबलेट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराएगी। इससे उन्हें शासन से जुड़े मुकदमों की जानकारी समय-समय पर मिलती रहेगी और न्यायिक कार्यों में तकनीक का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
स्वतंत्रता आंदोलन में प्रयागराज का अहम योगदान
मुख्यमंत्री ने हिंदी दिवस, हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गणपति को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में बुद्धि, विवेक और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन, संविधान निर्माण और लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रयागराज की धरती इसका गवाह रही है। मोतीलाल नेहरू और महामना मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रयागराज आने पर संगम में डुबकी लगाते समय देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का स्मरण होता है। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भारतीय संस्कृति और जनआस्था में गहरी श्रद्धा थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया है। विश्वविद्यालय का कार्य प्रारंभ हो चुका है और इसका भव्य परिसर जल्द तैयार होगा।
बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो पहिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि बार और बेंच न्याय व्यवस्था के रथ के दो पहिए हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद और सहयोग बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका सुशासन और विधि के शासन को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियां थीं। सरकार ने इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।
पुलिस प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई गई
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। उस समय पुलिस की प्रशिक्षण क्षमता भी सीमित थी और एक वर्ष में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को ही प्रशिक्षण दिया जा पाता था। सरकार ने प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाकर सात हजार कर दी है और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवासीय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इसी तरह न्यायपालिका के लिए भी बेहतर आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं।
अभियोजन प्रणाली ऑनलाइन, 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है। जेलों और न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि मुकदमों की सुनवाई में लगने वाला समय कम हो सके। न्यायालयों में समय से साक्ष्य प्रस्तुत करने और न्यायिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एकीकृत न्यायालय परिसर की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे परिसरों में न्यायिक कार्यों के साथ आवासीय सुविधाएं, अधिवक्ताओं के चैंबर, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और कैंटीन जैसी व्यवस्थाएं भी होंगी।
प्रदेश में 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक चैंबर, पुस्तकालय और सामुदायिक कक्षों के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ताओं की मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाई गई है और 70 वर्ष की आयु तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।