रटने से नहीं चलेगा काम! UP बोर्ड इंटर में बदलेगा परीक्षा पैटर्न, जानिए 80:20 का नया फॉर्मूला
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की इंटरमीडिएट परीक्षा के पैटर्न में अगले शैक्षणिक सत्र से बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF)-2023 और राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र ‘परख’ की सिफारिशों के आधार पर इंटरमीडिएट के सभी विषयों में लिखित परीक्षा 80 अंकों की करने की योजना बनाई जा रही है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक विषय का कुल मूल्यांकन पहले की तरह 100 अंकों का ही रहेगा, लेकिन इसमें 80 अंक लिखित परीक्षा और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन या प्रयोगात्मक परीक्षा के होंगे।
प्रैक्टिकल विषयों में घटेंगे 10 अंक
वर्तमान व्यवस्था में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गृह विज्ञान जैसे प्रायोगिक विषयों में 70 अंक की थ्योरी और 30 अंक की प्रयोगात्मक परीक्षा होती है। प्रस्तावित बदलाव के तहत इन विषयों में थ्योरी के अंक बढ़ाकर 80 और प्रैक्टिकल के अंक घटाकर 20 किए जाएंगे।
वहीं, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और अर्थशास्त्र जैसे गैर-प्रायोगिक विषयों में अभी 100 अंकों की लिखित परीक्षा होती है। नई व्यवस्था में इन विषयों की लिखित परीक्षा भी 80 अंकों की होगी और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित किए जाएंगे।
35 प्रतिशत तक होंगे अनुप्रयोग आधारित प्रश्न
नई परीक्षा प्रणाली में छात्रों की केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि उनकी विषय की समझ, तार्किक क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान को भी परखा जाएगा। राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने कक्षा 11 और 12 के लिए इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र के प्रतिदर्श प्रश्नपत्र तैयार किए हैं।
इन प्रश्नपत्रों में ‘परख’ की सिफारिशों के अनुरूप अधिकतम 35 प्रतिशत प्रश्न अनुप्रयोग आधारित रखने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विषयों को समझकर उनका वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना है।
हाईस्कूल के बाद इंटर में भी लागू होगी व्यवस्था
यूपी बोर्ड पहले ही हाईस्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था लागू कर चुका है। अब इसी दिशा में इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के मूल्यांकन में लिखित परीक्षा के साथ-साथ उनकी गतिविधियों, शैक्षणिक प्रदर्शन और विषय की व्यावहारिक समझ को भी महत्व मिलेगा।
यूपी बोर्ड की ओर से इस बदलाव को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नई पाठ्यचर्या के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों इंटरमीडिएट विद्यार्थियों को परीक्षा के नए पैटर्न के अनुसार तैयारी करनी होगी।
अब सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों और विद्यार्थियों को नए परीक्षा प्रारूप के अनुरूप तैयार करने की होगी। बोर्ड को नए सिलेबस, मॉडल पेपर और मूल्यांकन प्रणाली की जानकारी समय पर उपलब्ध करानी होगी, ताकि छात्र नए पैटर्न को आसानी से समझ सकें और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें।