पंचायत चुनावों में NOTA और प्रत्याशी का नाम छापने की मांग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
Dec 12, 2025, 13:16 IST
Lucknow: उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सुविधा और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। इस संबंध में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पंचायत चुनावों में NOTA (नोटा) का विकल्प लागू करने और बैलेट पेपर पर चुनाव चिन्ह के साथ प्रत्याशी का नाम भी अनिवार्य रूप से छापने की मांग की गई है।
यह जनहित याचिका मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशकार नरेश कुमार मौर्य ने अधिवक्ताओं देवी प्रसाद त्रिपाठी और देवीशंकर पांडेय के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता अक्सर सिर्फ चुनाव चिन्ह देखकर वोट डालते हैं, जिससे कभी-कभी सही प्रत्याशी की पहचान कठिन हो जाती है।
बैलेट पेपर पर नाम जोड़ने की मांग
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में पंचायत चुनावों के बैलेट पेपर पर केवल चुनाव चिन्ह होता है जबकि प्रत्याशी का नाम नहीं छापा जाता। इससे मतदाताओं को यह स्पष्ट नहीं होता कि वे आखिर किस उम्मीदवार को वोट दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नाम और चुनाव चिन्ह साथ होने से ग्रामीण मतदाता अधिक सटीक निर्णय ले सकेंगे।
पंचायत चुनाव में NOTA की जरूरत क्यों?
याचिका में यह भी मांग की गई है कि पंचायत चुनावों में भी NOTA का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में NOTA की सुविधा पहले से मौजूद है, इसलिए पंचायत स्तर पर इसे लागू करना मतदाताओं के अधिकारों को और मजबूत करेगा।
चूंकि पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होते हैं, इसलिए NOTA जोड़ने में किसी तरह की तकनीकी कठिनाई भी नहीं होगी।
आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई
इस याचिका पर सुनवाई आज लखनऊ पीठ में निर्धारित है। मामला न्यायमूर्ति रंजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। वहीं विस्तृत सुनवाई चीफ जस्टिस दिवाकर प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति बृजेश सिंह की बेंच करेगी।
निर्वाचन आयोग ने उठाई आपत्ति
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि पंचायत चुनावों के लिए लगभग 60 करोड़ बैलेट पेपर की आवश्यकता होगी, जिनमें से बड़ी संख्या में मतपत्र पहले ही छप चुके हैं। आयोग का कहना है कि अब बैलेट पेपर में बदलाव करने से चुनाव समय पर कराना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने आयोग की दलील को गलत बताते हुए कहा है कि सभी बैलेट पेपर अभी छपे नहीं हैं। उनके अनुसार तहसील स्तर पर करीब 12.5 करोड़ और तीनों चरणों को मिलाकर लगभग 55–60 करोड़ बैलेट पेपर की जरूरत पड़ती है।