शिक्षामित्रों के लिए खुशखबरी! योगी सरकार ने दोगुना किया मानदेय, इसी महीने से लागू
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में 1.42 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया। अब शिक्षामित्रों को 18,000 और अनुदेशकों को 17,000 रुपए मिलेंगे। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश और लंबे संघर्ष के बाद लिया गया है।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के 1.42 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का ऐलान किया। अब शिक्षामित्रों को 10,000 रुपए के बजाय 18,000 रुपए और अनुदेशकों को 9,000 रुपए के स्थान पर 17,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। यह नई दरें इसी महीने से लागू होंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस फैसले से लाखों शिक्षाकर्मियों को आर्थिक राहत मिलेगी। उन्होंने पहले ही 26 फरवरी को बजट सत्र के दौरान मानदेय बढ़ाने का संकेत दिया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाया गया है।
शिक्षामित्रों का लंबा संघर्ष
प्रदेश में वर्ष 2001 से शिक्षामित्रों की नियुक्ति शुरू हुई थी। सपा सरकार ने 2013-14 में इन्हें सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित किया था, लेकिन 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इस समायोजन को रद्द कर दिया। इसके बाद करीब 1.72 लाख शिक्षामित्र फिर से मानदेय पर आ गए।
सरकार ने आंदोलन के बाद उनका मानदेय 3,500 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए किया था और सहायक अध्यापक भर्ती में वरीयता देने की व्यवस्था भी लागू की थी।
अनुदेशकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
अनुदेशकों के मानदेय को लेकर भी लंबी कानूनी लड़ाई चली। वर्ष 2017 में मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपए करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन यह लागू नहीं हो सका।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अनुदेशकों को 17,000 रुपए मानदेय दिया जाए और उनकी नौकरी समाप्त नहीं की जाए। कोर्ट ने यह भी माना कि लंबे समय तक सेवा देने के कारण यह पद स्वतः सृजित हो चुका है।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षामित्रों की बड़ी संख्या के कारण शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर बना हुआ है। वर्तमान में यह अनुपात 1:22 है, जो मानक 1:30 से बेहतर है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और शिक्षाकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।