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UP में बिजली को लेकर सरकार अलर्ट! CM योगी का बड़ा आदेश- गांव हो या शहर, कटौती बिल्कुल नहीं

उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड बिजली मांग और भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग को गांव और शहर में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण, स्मार्ट मीटर व्यवस्था सुधारने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

 

उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची बिजली मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग को हाई अलर्ट मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि गांव हो या शहर, कहीं भी बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए और आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, वितरण व्यवस्था, शिकायत निस्तारण और स्मार्ट मीटर सिस्टम तक हर स्तर पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच सरकार की बड़ी तैयारी

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस वर्ष प्रदेश में बिजली की पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। अप्रैल और मई में तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत बिजली मांग 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गई। 20 से 22 मई के दौरान उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक बिजली खपत वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बढ़ती मांग को देखते हुए सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत रखी जाए, ताकि किसी भी इलाके में कटौती की नौबत न आए।

बिजली उत्पादन क्षमता में 86% की बड़ी बढ़ोतरी

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो चुकी है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है। वहीं जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट बिजली मिल रही है।

इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा जैसी संयुक्त परियोजनाओं से राज्य को 3,742 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता प्राप्त हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन क्षमता में लगभग 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी आधुनिक और भरोसेमंद बनाना जरूरी है। बैठक में जानकारी दी गई कि यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के पास फिलहाल 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें हैं। प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के जरिए 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध कराई जा रही है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि गर्मी और आंधी-तूफान के मौसम में बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

आंधी-तूफान के बीच भी बिजली बहाली के निर्देश

बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे। हालांकि विभाग ने तेजी से मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी आपदा या खराब मौसम की स्थिति में त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम हमेशा सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि भूमिगत केबल वाले क्षेत्रों में खुदाई से पहले विधिवत अनुमति सुनिश्चित की जाए ताकि बिजली व्यवस्था बाधित न हो।

ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं में आई बड़ी कमी

ऊर्जा विभाग ने बैठक में जानकारी दी कि पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर सिर्फ 87 रह गई।

इसी तरह 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा तंत्र, नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय होने से यह सुधार संभव हुआ।

स्मार्ट मीटर और बिलिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को पूरी तरह उपभोक्ता हितैषी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। राज्य सरकार के निर्देश के बाद सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में बदल दिया गया है।

अब जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड बिल जारी किए जाएंगे। बिल एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल मिलना बेहद जरूरी है। बिलिंग और कलेक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए विभाग को और प्रभावी तरीके से काम करना होगा।

हेल्पलाइन और शिकायत निस्तारण पर सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाना चाहिए कि समस्या कब तक हल होगी। नवंबर 2025 से नई 1912 हेल्पलाइन व्यवस्था लागू की गई है, जिसकी कॉल हैंडलिंग क्षमता बढ़ाकर 90 हजार प्रतिदिन कर दी गई है।

भविष्य की जरूरतों के लिए दीर्घकालिक योजना

सरकार ने आने वाले वर्षों की बिजली जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीति पर भी काम शुरू कर दिया है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2015 से 2026 के बीच यूपी ने कुल 32,305 मेगावाट क्षमता के लिए टाई-अप किए हैं। वर्ष 2029 तक 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। इसमें विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है।

“बिजली आपूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिजली केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और आम जनता की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति में लापरवाही या शिकायतों के निस्तारण में देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि भीषण गर्मी के इस दौर में प्रदेशवासियों को भरोसेमंद, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।