ये सब नाटक है...राम मंदिर चंदा विवाद पर अफजाल अंसारी का हमला, बोले- SIT नहीं, शंकराचार्यों से कराई जाए जांच
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित गबन एवं अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सियासत लगातार गरमाई हुई है। इसी बीच गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी ने मामले की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अफजाल अंसारी ने कहा कि इस मामले की जांच एसआईटी के बजाय सनातन धर्म के चारों शंकराचार्यों को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य धर्म के सर्वोच्च और सबसे पवित्र पदों पर आसीन हैं तथा उनकी जांच पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह सब नाटक है। सनातन धर्म के लिए चार पीठों की स्थापना की गई है और चार शंकराचार्य नियुक्त हैं। इस पूरे मामले की जांच उन्हीं को सौंप दी जाए। उनकी रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाए, उसे दंडित किया जाए।"
"इस पाप का हिसाब इसी दुनिया में होगा"
सपा सांसद ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने वाले लोगों को इस मामले में जवाब देना होगा। उन्होंने दावा किया कि अब कई ऐसे लोग सामने आ रहे हैं, जिन्होंने मंदिर को मुकुट और अन्य कीमती वस्तुएं दान की थीं, लेकिन उन्हें किसी प्रकार की रसीद नहीं दी गई।
अफजाल अंसारी ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह गंभीर मामला है और इसका हिसाब-किताब इसी दुनिया में हो जाएगा।
SIT ने शासन को सौंपी रिपोर्ट
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। 13 जून को लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में इस जांच समिति का गठन किया गया था।
जांच के दौरान टीम ने अयोध्या पहुंचकर मंदिर प्रबंधन, कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों से पूछताछ की तथा संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया। हालांकि बिना एफआईआर के जांच कराए जाने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा
राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी का मुद्दा सबसे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 7 जून को उठाया था। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे की राशि और दान में मिली वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए थे।
इसके बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। मंदिर प्रबंधन ने शुरुआती दौर में आरोपों को खारिज किया था, लेकिन बाद में सामने आए कुछ दावों और बयानों के चलते मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
फिलहाल एसआईटी की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।