जामिया प्रदर्शन पर सियासी घमासान: 3 सांसदों के खिलाफ FIR, छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर जारी है विरोध
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग पर प्रदर्शन जारी है। विश्वविद्यालय की शिकायत पर तीन सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। चार छात्र 13 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर करीब दो सप्ताह से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों की मांग है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को फिर से बहाल किया जाए और चुनाव की तारीख घोषित की जाए। प्रदर्शन में शामिल चार छात्र 13 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से निर्वाचित छात्र संघ नहीं है। वे चाहते हैं कि इसी सेमेस्टर में चुनाव कराने की समय-सीमा घोषित की जाए। इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी उठाई जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच क्या हुआ?
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, शनिवार को कुलपति मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार एमडी महताब आलम रिजवी सहित 1,500 से अधिक शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी अंसारी ऑडिटोरियम के लॉन से गेट नंबर 7 तक पहुंचे। प्रशासन ने दावा किया कि कर्मचारियों ने करीब दो घंटे तक प्रदर्शनकारी छात्रों से आंदोलन खत्म करने और जगह खाली करने की अपील की, लेकिन छात्र वहां से नहीं हटे।
दूसरी ओर, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की जामिया इकाई ने आरोप लगाया कि प्रॉक्टर, रजिस्ट्रार और सुरक्षा सलाहकार ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को हटाने की कोशिश की। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के टेंट हटाए गए और छात्राओं को खींचकर ले जाया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी आरोप लगाया कि कुछ छात्रों ने सुरक्षा गार्डों और शिक्षकों को धक्का दिया। इस तरह प्रदर्शन को लेकर छात्रों और प्रशासन के दावे अलग-अलग हैं।
पुलिस कार्रवाई पर SFI ने उठाए सवाल
SFI ने आरोप लगाया कि गेट नंबर 7 के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई को छात्रों के खिलाफ दमनात्मक कदम बताया।
एक छात्र ने भी दावा किया कि पुलिस की भारी तैनाती के कारण छात्रों को परिसर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और छात्रों को हिरासत में लिए जाने को लेकर रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन तथा छात्र संगठनों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन की कक्षाएं
प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शनिवार से कक्षाएं ऑनलाइन करने का फैसला लिया। छात्रों को परिसर में आने से बचने के निर्देश दिए गए। साथ ही विश्वविद्यालय के गेट और लाइब्रेरी अगले आदेश तक बंद रखने की जानकारी दी गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के लिए गेट नंबर 18 निर्धारित है, जबकि गुलिस्तान-ए-गालिब लॉन में जारी धरने को उसने अनधिकृत कब्जा बताया है।
छात्र संघ के संविधान के लिए समिति गठित
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्रों की मांगों पर बातचीत के लिए सात प्रोफेसरों की एक समिति बनाई गई है। समिति छात्रों के साथ चार दौर की बातचीत कर चुकी है। इसके अलावा 21 अक्टूबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति अधिसूचित की गई थी।
प्रशासन ने 12 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर छात्रों के खिलाफ की गई या प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करने का भी आश्वासन दिया है। वहीं, SFI की मांग है कि संविधान तैयार करने वाली समिति में छात्रों को शामिल किया जाए और इसी सेमेस्टर में चुनाव की तारीख घोषित हो।
प्रदर्शनकारी छात्र सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां वापस लेने के साथ मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। ऐसे में छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच विवाद का रूप ले चुका है।