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जानें क्या करेगा OBC आयोग, क्या है ट्रिपल टेस्ट और कैसे तय होगा आरक्षण?
 

 

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने सोमवार, 18 मई को ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ (UP State Dedicated Backward Classes Commission) के गठन को मंजूरी दे दी। यह आयोग पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण का निर्धारण करेगा और इसके लिए जरूरी सर्वेक्षण एवं अध्ययन भी कराएगा।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है, जिनमें स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था।

दरअसल, मार्च 2026 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान आयोग के गठन में देरी पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने से पहले आयोग गठन और आरक्षण प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इसके बाद सरकार ने आयोग के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी।

क्यों जरूरी है आयोग का गठन?

अदालतों ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें बिना ठोस आंकड़ों और अध्ययन के स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण नहीं दे सकतीं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए “ट्रिपल टेस्ट” (Triple Test) का पालन करना अनिवार्य है।

ट्रिपल टेस्ट के तहत तीन प्रमुख शर्तें शामिल हैं—

  • पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक समर्पित आयोग का गठन
  • सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का व्यावहारिक एवं अनुभवजन्य सर्वेक्षण
  • संवैधानिक सीमा के भीतर आरक्षण का अनुपात तय करना

इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश सरकार ने यह नया आयोग गठित किया है।

आयोग क्या करेगा?

यह आयोग प्रदेश के सभी 75 जिलों में जाकर पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक और जनसंख्या संबंधी स्थिति का अध्ययन करेगा। जातिवार आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।

आयोग की सिफारिशों के आधार पर यह तय होगा कि किस पंचायत में ओबीसी वर्ग के लिए कितनी सीटें आरक्षित की जाएंगी। सरकार का प्रयास है कि आरक्षण का पूरा आधार इतना मजबूत हो कि भविष्य में इसे अदालत में चुनौती न दी जा सके।

वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि आयोग ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का समकालीन और अनुभवजन्य अध्ययन करेगा, ताकि पंचायतवार आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

क्या होता है ‘ट्रिपल टेस्ट’?

‘ट्रिपल टेस्ट’ सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित एक संवैधानिक मानक है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण संतुलित और कानूनी रूप से वैध हो।

अतीत में कई बार बिना पर्याप्त आंकड़ों के आरक्षण लागू किए जाने पर अदालतों ने चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाई थी। ऐसे में ट्रिपल टेस्ट का पालन आरक्षण को मजबूत कानूनी आधार देता है और चुनावों में बाधा आने की संभावना कम करता है।

पंचायत चुनाव का राजनीतिक महत्व

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं। राज्य में पंचायतों के विभिन्न स्तरों पर 8 लाख से अधिक पदों पर चुनाव होते हैं।

2021 के पंचायत चुनावों में 58,189 ग्राम पंचायतों के लगभग 7.32 लाख वार्डों में मतदान हुआ था। इसके अलावा 826 क्षेत्र पंचायतों के 75,855 वार्डों और 75 जिला पंचायतों के 3,051 सदस्यों का चुनाव कराया गया था।

हालांकि पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के आधिकारिक चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाते, लेकिन इन चुनावों का असर विधानसभा चुनावों तक दिखाई देता है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दल पंचायत चुनावों को अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा अवसर मान रहे हैं।

आरक्षण का गणित कैसे तय होगा?

संविधान के अनुच्छेद 243D और राज्य के कानूनों के तहत पंचायतों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया जाता है।

* SC और ST वर्ग को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलता रहेगा।
* पंचायतों में OBC आरक्षण की अधिकतम सीमा 27 प्रतिशत तक रहेगी।
* यदि पिछड़े वर्गों की सटीक जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तो सरकार सर्वेक्षण के जरिए उनकी संख्या तय कराएगी।

आयोग में कौन होंगे सदस्य?

इस आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे। आयोग के अध्यक्ष हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे, जबकि अन्य सदस्यों को पिछड़ा वर्ग मामलों की विशेषज्ञता के आधार पर नियुक्त किया जाएगा।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह महीने का होगा। इसी अवधि में आयोग को सर्वेक्षण पूरा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी, जिसके आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी।