UNGA में मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज की भागीदारी, रवांडा के राजदूत समेत कई हस्तियों से की मुलाकात
Jaunpur/New Delhi : उत्तर प्रदेश के मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क दौरे पर हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह 4 से 11 अक्टूबर 2026 तक भारतीय संसद के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं।
इस दौरान सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में भाग लिया। साथ ही विभिन्न देशों के राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
रवांडा के राजदूत मार्टिन के. नगोगा से मुलाकात
न्यूयॉर्क दौरे के दौरान सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र में रवांडा के स्थायी प्रतिनिधि मार्टिन के. नगोगा से मुलाकात की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस दौरान वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय महत्व के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
संयुक्त राष्ट्र के कंट्रोलर से भी किया संवाद
सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के कंट्रोलर चंद्रमौली रामनाथन से भी मुलाकात की। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने अपने दौरे से जुड़े अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी साझा किए। उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंच पर होने वाली बैठकों और संवादों से भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने तथा वैश्विक कूटनीति को करीब से समझने का अवसर मिला।
हिंदी दिवस समारोह में भी रहीं शामिल
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में सांसद प्रिया सरोज की भागीदारी भी उनके दौरे का प्रमुख हिस्सा रही। इस कार्यक्रम में हिंदी भाषा और उसके अंतरराष्ट्रीय महत्व से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज की इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भागीदारी को युवा जनप्रतिनिधियों की वैश्विक मंचों पर बढ़ती सक्रियता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से भी रखा पक्ष
न्यूयॉर्क दौरे के दौरान प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत की ओर से वक्तव्य भी दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक आचरण के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा तथा सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।