मेरठ घटना पर मायावती का बड़ा हमला, बोलीं- सड़क पर नहीं, संविधान के रास्ते...
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान मेरठ और सहारनपुर में हाल ही में हुई घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए भीम आर्मी प्रमुख एवं आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन अपने निजी स्वार्थ के लिए पीड़ितों को भड़काकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
मायावती ने कहा कि दुख की घड़ी में सड़कों पर उतरना, चक्काजाम करना और राजनीति करना न्याय पाने का रास्ता नहीं है। इससे पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिलता, बल्कि उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की सीख का हवाला देते हुए कहा कि अत्याचार के खिलाफ लड़ाई कानून के दायरे में रहकर और संविधान के अनुसार लड़ी जानी चाहिए। यदि निचली अदालत से न्याय न मिले तो ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए, क्योंकि संविधान में इसकी पूरी व्यवस्था है।
'पीड़ितों को भड़काकर अशांति फैलाना गलत'
बसपा प्रमुख ने विपक्षी दलों और कुछ संगठनों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पीड़ित परिवारों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। पहले लोगों को भड़काकर हिंसा और अशांति का माहौल बनाया जाता है, फिर सहानुभूति दिखाने के लिए घटनास्थल पर पहुंचकर "मगरमच्छ के आंसू" बहाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति समाज और लोकतंत्र दोनों के लिए नुकसानदायक है।
अंबेडकर के संवैधानिक मार्ग पर चलने की अपील
मायावती ने जनता से अपील करते हुए कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा बताए गए शांतिपूर्ण और संवैधानिक रास्ते पर चलना ही समाज के हित में है। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी एकजुटता और वोट की ताकत को पहचानना होगा। राजनीतिक सत्ता में भागीदारी के जरिए ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
चुनाव से पहले सतर्क रहने की सलाह
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कई राजनीतिक दल और संगठन सक्रिय हो जाते हैं और लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। जनता को ऐसे बहकावे से बचना चाहिए।
क्या है मेरठ का मामला?
मेरठ की रहने वाली ललिता गौतम 15 मई को लापता हुई थीं। 17 मई को उनका शव रोहटा क्षेत्र में मिला था। पुलिस ने मुख्य आरोपी को 18 मई को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि बाद में सबूत मिटाने के आरोप में एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। 8 जुलाई को पीड़ित परिवार के समर्थन में डीएम कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने कथित रूप से बिना अनुमति सड़क जाम कर दिया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान डीएम कार्यालय के गेट को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिस पर पथराव किया गया। करीब छह घंटे तक चले इस प्रदर्शन में दो एंबुलेंस जाम में फंस गईं और 11 पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है और 30 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
सहारनपुर में क्या हुआ था?
सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के लालवाला गांव में जमीन और मूर्ति स्थापना को लेकर हुए विवाद के दौरान दलित समुदाय के लोगों के साथ मारपीट और झड़प हुई थी। इस घटना पर मायावती ने पहले भी निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इस मामले को लेकर भी विरोध प्रदर्शन हुए, जिनका जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि संवेदनशील मामलों में लोगों को उकसाने के बजाय कानून और संविधान के दायरे में रहकर न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए।