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UP में गो संरक्षण का मेगा प्लान: गोशालाओं में तैनात होंगी ‘कृषि सखियां’, महिलाओं को मिलेगा रोजगार
 

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार ने गो संरक्षण को नई और आधुनिक दिशा देने के लिए अब तक का सबसे बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत गो संरक्षण को केवल सेवा भावना तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती से जोड़ते हुए एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक प्रदेश के सभी 75 जिलों की साढ़े सात हजार से अधिक गोशालाओं में अब ‘कृषि सखियों’ की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखियां गांव स्तर पर गो संरक्षण अभियान का नेतृत्व करेंगी और गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

आजीविका मिशन की महिलाओं को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को केंद्रीय भूमिका दी गई है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को गो संरक्षण अभियान से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में तैयार किया जाएगा।

प्रशिक्षित महिलाएं गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को गोशाला प्रबंधन, जैविक खाद निर्माण और पशुपालन से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण देंगी। इससे गोशालाएं रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बन सकेंगी।

गोबर से बनेगी जैविक खाद, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, सरकार गोशालाओं को रोजगार और जैविक कृषि के मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है। गोशालाओं से निकलने वाले गोबर का उपयोग बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने में किया जाएगा।

महिलाओं के नेतृत्व में संचालित खाद निर्माण इकाइयों से न केवल गोवंश संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। माना जा रहा है कि यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

खेती की लागत घटाने और स्वास्थ्य सुधारने पर फोकस

सरकार का मानना है कि जैविक खाद के अधिक उत्पादन से किसानों की रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी। इससे खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से लोगों को स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित और बेहतर खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।

सरकार इस पूरी पहल को गांव, किसान, महिला और गोवंश को एक साथ जोड़ने वाले व्यापक ‘गो समृद्धि अभियान’ के रूप में देख रही है।