UP में विकास को रफ्तार: पंचायतों के लिए 83 हजार करोड़, नगर निकायों को 33,500 करोड़ मंजूर
लखनऊ I आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकायों (नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं) के लिए अच्छी खबर है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर अगले पांच वर्षों (2026-27 से 2030-31) में यूपी के स्थानीय निकायों को कुल 1.16 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह राशि 15वें वित्त आयोग के मुकाबले लगभग दोगुनी है, जिससे विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
15वें वित्त आयोग के दौरान पिछले पांच वर्षों में स्थानीय निकायों के लिए कुल 57,500 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए थे, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं के लिए 38,261 करोड़ रुपये और नगरीय निकायों के लिए 19,500 करोड़ रुपये शामिल थे। वहीं, 16वें वित्त आयोग ने इस राशि को बढ़ाकर 1,16,500 करोड़ रुपये कर दिया है। इसमें पंचायतों के विकास और अन्य कार्यों के लिए 83,000 करोड़ रुपये तथा नगरीय निकायों को 33,500 करोड़ रुपये मिलेंगे।
इस बढ़ोतरी से पिछले आवंटन की तुलना में 59,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध होगी, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, पेयजल, सड़कों और अन्य विकास कार्यों को गति देगी।
हालांकि, एक तरफ स्थानीय निकायों के लिए धनराशि बढ़ी है, वहीं केंद्रीय करों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी में मामूली कमी आई है। 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य की हिस्सेदारी 17.939 प्रतिशत थी, जो अब घटाकर 17.619 प्रतिशत कर दी गई है। इस 0.32 प्रतिशत की कमी के कारण राज्य को केंद्रीय करों, विशेष सहायता अनुदान और अन्य मदों में प्रतिवर्ष लगभग 6,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फिर भी, स्थानीय निकायों के लिए बढ़ी हुई अनुदान राशि से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी विकास में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्यों को केंद्रीय कर पूल से 41 प्रतिशत हिस्सा बरकरार रखा गया है।