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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़े एक्शन की तैयारी, 6 लोगों पर होगी FIR! ट्रस्ट में भी हो सकते हैं बदलाव

 

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं के मामले में जांच तेज हो गई है। विशेष जांच समिति (एसआईटी) की पड़ताल के बाद अब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है।

सूत्रों का दावा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है। चर्चा है कि ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है।

एसआईटी जांच के बाद तेज हुई कार्रवाई

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बाद विशेष जांच समिति गठित की गई थी। अब जांच पूरी होने के बाद प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

हालांकि अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से एफआईआर को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल

इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने भी सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बिना एफआईआर के एसआईटी का कोई औचित्य नहीं है।

लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने एसआईटी के कामकाज पर तंज कसते हुए कहा था कि "एसआईटी का मतलब शेयर इन थेफ्ट (चोरी में हिस्सेदारी) नहीं होना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने का माध्यम होना चाहिए।"

चढ़ावे की राशि को लेकर जताई थी चिंता

अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में देश-विदेश से बड़ी मात्रा में दान और चढ़ावा प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं इस मंदिर से जुड़ी हैं, इसलिए चढ़ावे से जुड़े हर आरोप की पारदर्शी जांच जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर में आने वाले दान की राशि काफी बड़ी हो सकती है और ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्रस्ट में बदलाव की भी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, जांच के बाद केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। इसी क्रम में ट्रस्ट के प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए सीईओ की नियुक्ति पर विचार किया जा रहा है।

फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और संभावित एफआईआर पर टिकी हैं। यदि एफआईआर दर्ज होती है तो यह मामला और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक चर्चा का विषय बन सकता है।