{"vars":{"id": "130921:5012"}}

UP में आयुष चिकित्सा को बढ़ावा: 1034 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और 225 योग केंद्र स्थापित, 16 एकीकृत अस्पताल संचालित
 

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में आयुष चिकित्सा पद्धतियों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आम जनता तक पहुंचाने के साथ ही इनके शैक्षणिक, चिकित्सकीय और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। प्रदेश में अब तक 1034 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और 225 योग वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं, 16 एकीकृत आयुष अस्पताल संचालित हैं।

वर्ष 2017 में हुआ अलग आयुष विभाग का गठन

प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत व्यवस्था के तहत संचालित करने के उद्देश्य से वर्ष 2017 में अलग आयुष विभाग का गठन किया गया था। इससे पहले आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी से जुड़ी सेवाएं अलग-अलग विभागीय व्यवस्थाओं के अंतर्गत संचालित होती थीं।

नए विभाग के गठन के बाद इन चिकित्सा पद्धतियों के विकास, विस्तार और बेहतर प्रबंधन के लिए एक साझा प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की गई। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़कर आम नागरिकों को उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है।

गोरखपुर में स्थापित हुआ प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय

आयुष चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार के अनुसार, विश्वविद्यालय की आधारशिला अगस्त 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रखी थी, जबकि जुलाई 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसका उद्घाटन किया।

करीब 52 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित यह उत्तर प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय है। इससे लगभग 100 आयुष महाविद्यालय संबद्ध हैं। विश्वविद्यालय के माध्यम से बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस सहित विभिन्न स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों की शिक्षा और परीक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रदेश में 16 एकीकृत आयुष अस्पताल संचालित

जिला स्तर पर आयुष चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार ने एकीकृत आयुष अस्पतालों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है। दिसंबर 2021 में प्रदेश के आठ शहरों में 50 बेड वाले एकीकृत आयुष अस्पतालों का उद्घाटन किया गया था। इसके साथ ही छह नए अस्पताल स्थापित करने की घोषणा की गई थी।

विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में 50 बेड वाले 16 एकीकृत आयुष अस्पताल पूरी तरह संचालित हैं। इसके अतिरिक्त बुलंदशहर, फतेहपुर, हरदोई और उन्नाव में चार अस्पतालों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, मेरठ में 50 बेड और जौनपुर में 30 बेड के एकीकृत आयुष अस्पताल का निर्माण कार्य जारी है।

इन अस्पतालों में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से मरीजों को उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

गांवों तक पहुंच रही आयुष चिकित्सा सेवाएं

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा की पहुंच बढ़ाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का विस्तार किया है। राज्य में 1034 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और 225 योग वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं।

इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को आयुर्वेदिक परामर्श, नियमित योगाभ्यास, स्वस्थ जीवनशैली और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि आयुष चिकित्सा सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी इसका लाभ दिया जा सके।

3968 अस्पतालों, क्लीनिकों और औषधालयों का नेटवर्क

प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं के लिए कुल 3968 क्लीनिक, अस्पताल और डिस्पेंसरी होने की जानकारी दी गई है। इनके माध्यम से विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों के तहत उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत सरकारी आयुष अस्पतालों और औषधालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।

इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में आयुष चिकित्सा सुविधाओं को उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरीज अपनी जरूरत के अनुसार उपचार के विभिन्न विकल्पों का लाभ उठा सकें।

सरकार की इन पहलों का उद्देश्य आयुष चिकित्सा की पहुंच बढ़ाने के साथ शिक्षा, अनुसंधान और उपचार सेवाओं को मजबूत बनाना है। हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक उपलब्धता, चिकित्सकों की तैनाती और मरीजों को मिलने वाले लाभ का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा।