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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान: ‘गोमाता की रक्षा पर समझौता नहीं, धर्मयुद्ध यात्रा का ऐलान’
 

 

अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जनपद में रविवार सुबह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के चरण पादुका पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी।

उन्होंने बताया कि उनकी प्रस्तावित “धर्मयुद्ध यात्रा” आगामी 3 मई से 23 जुलाई तक पूरे प्रदेश में निकाली जाएगी। यह यात्रा गोमाता की अनदेखी और उनके साथ हो रहे अन्याय के विरोध में होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्थिति सुधारने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

शंकराचार्य ने कहा कि “गोमाता की रक्षा हर किसी का दायित्व है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो। हम हिंदू समाज यह स्वीकार नहीं कर सकते कि हमारी माता को काटकर विदेशी मुद्रा के लिए बेचा जाए।”

‘सरकारी संतों से भला नहीं होने वाला’

स्वामी रामभद्राचार्य के साथ विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि आज संत दो वर्गों में बंट गए हैं—सरकारी और असरकारी। उन्होंने स्वयं को असरकारी संत बताते हुए कहा कि “सरकारी संतों से समाज का भला नहीं हो सकता। वे सत्ता के पक्ष में बोलते हैं, जबकि साधुओं का कर्तव्य है कि वे जनता की आवाज बनकर सरकार से सवाल करें।”

यूजीसी संशोधन पर भी उठाए सवाल

शंकराचार्य ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) में किए गए संशोधनों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नए नियमों में कुछ वर्गों की शिकायतों को प्राथमिकता देकर कार्रवाई की जाएगी, जबकि आरोपित व्यक्ति को अपनी बेगुनाही साबित करनी पड़ेगी, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

गौरतलब है कि शनिवार को जनपद पहुंचने के बाद शंकराचार्य टांडा के गोवर्धनपुर स्थित ज्योर्तिमठ, उत्तराखंड के वित्त विभाग के प्रमुख मदन मोहन उपाध्याय के आवास पर रात्रि विश्राम किया था।