UP में बदलने वाली है सियासत की तस्वीर! 403 से 605 तक बढ़ सकती हैं विधानसभा सीटें
Lucknow : उत्तर प्रदेश में भविष्य में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित संशोधनों के बाद होने वाले संभावित परिसीमन के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में करीब 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सीटें 80 से बढ़कर लगभग 120 हो सकती हैं। वहीं विधानसभा में भी मौजूदा 403 सीटों की संख्या बढ़कर करीब 605 होने का अनुमान है। इससे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
जिलों में बढ़ सकते हैं विधानसभा क्षेत्र
अनुमान के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में वर्तमान में औसतन 3 से 5 विधानसभा क्षेत्र हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 6 से 8 विधानसभा क्षेत्र तक हो सकते हैं। इससे जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होने की संभावना है।
आबादी और सीटों का बदलता गणित
आजादी के बाद हुए पहले चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1951 में उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 6.32 करोड़ थी और 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में कुल 347 सीटें थीं। उस समय एक विधानसभा सीट पर औसतन करीब 1.82 लाख आबादी थी।
इसके बाद 1971 तक आबादी बढ़कर करीब 8.83 करोड़ हो गई और 1973 के परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ाकर 425 कर दी गई, जिससे प्रति सीट आबादी करीब 2.8 लाख हो गई।
वर्ष 2002 में राज्य के विभाजन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या घटकर 403 रह गई। वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की आबादी लगभग 19.98 करोड़ हो गई, जिससे वर्तमान में एक विधानसभा सीट पर औसतन करीब 4.95 लाख आबादी का प्रतिनिधित्व होता है।
अगर सीटों की संख्या बढ़कर 605 हो जाती है, तो 2011 की आबादी के हिसाब से एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन लगभग 3.30 लाख आबादी रह जाएगी।
2027 चुनाव पर असर नहीं, 2032 में दिख सकता है बदलाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह संभावित परिसीमन 2027 के विधानसभा चुनाव को प्रभावित नहीं करेगा। लेकिन परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2032 तक उत्तर प्रदेश से 600 से अधिक विधायक चुने जाने की संभावना जताई जा रही है।
बड़े और छोटे विधानसभा क्षेत्र
वर्तमान में राज्य में आबादी के लिहाज से साहिबाबाद, लोनी और मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़े माने जाते हैं, जहां क्रमशः करीब 12 लाख, 8 लाख और 7.5 लाख से अधिक मतदाता हैं। वहीं सबसे छोटे विधानसभा क्षेत्रों में महोबा और सीसामऊ का नाम शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन के बाद जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होगा और प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत हो सकेगी।