UP के सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर: 3 महीने तक होगी बच्चों की पढ़ाई की समीक्षा, पहुंचेंगी गणित-विज्ञान किट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अगले तीन महीनों तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा की ओर से नवंबर, दिसंबर और जनवरी के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रमुख कार्य निष्पादन संकेतक (केपीआई) निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों के शैक्षणिक आकलन, स्कूलों में संसाधनों की उपलब्धता, डिजिटल शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
निपुण एप से होगा विद्यार्थियों का शैक्षणिक आकलन
अभियान के तहत निपुण एप और निर्धारित तालिका के माध्यम से शत-प्रतिशत विद्यार्थियों का शैक्षणिक आकलन किया जाएगा। बच्चों की पढ़ाई में प्रगति से संबंधित रिपोर्ट उनके अभिभावकों के साथ भी साझा की जाएगी, ताकि वे अपने बच्चों के शैक्षणिक स्तर की जानकारी प्राप्त कर सकें।
इसके अलावा विद्यालयों में गणित-विज्ञान किट और प्रिंट रिच शिक्षण सामग्री की खरीद 30 दिसंबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सभी विद्यार्थियों को एक्सपोजर विजिट कराने की भी योजना है।
75 जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण की निगरानी
प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण कार्य की निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल और जर्जर भवनों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया जाएगा।
विद्यालयों में सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
बालिकाओं के नामांकन और आरटीई के तहत प्रवेश पर जोर
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के उच्चीकरण के साथ ही बालिकाओं के नामांकन और नियमित उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत आवंटित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं, तीन से छह वर्ष तक के बच्चों का बालवाटिका में नामांकन कराने और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) के लिए एजुकेटर की तैनाती पर भी जोर रहेगा।
स्कूल से बाहर बच्चों का होगा सर्वे, दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगी ब्रेल सामग्री
अभियान के दौरान स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान के लिए सर्वे कराया जाएगा और उनका विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुसार ब्रेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके साथ ही विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, अपार आईडी और टैबलेट की क्रियाशीलता की समीक्षा की जाएगी। इस विशेष अभियान का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।