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राम मंदिर चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट मोहन भागवत को भेजी गई, ट्रस्ट के पुनर्गठन की तैयारी, 6 जुलाई की बैठक में हो सकते हैं बड़े फैसले

 

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, संघ प्रमुख मोहन भागवत के निर्देश पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने अयोध्या में तीन दिन प्रवास कर राम मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा विवाद से जुड़े पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट संघ प्रमुख को सौंप दी है।

बताया जा रहा है कि 6 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में इस रिपोर्ट के आधार पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

चढ़ावा विवाद के बाद सख्त रुख

सूत्रों के अनुसार, दान और व्यवस्थाओं को लेकर सामने आए विवादों के बाद संघ ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रहा है। कुछ पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर भी मंथन चल रहा है। चर्चा है कि कुछ पदाधिकारियों के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं और नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं।

सूत्रों का यह भी दावा है कि चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट सदस्य गोपाल राव की भूमिका पर भी 6 जुलाई की बैठक में फैसला हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ट्रस्ट के पुनर्गठन पर मंथन

सूत्रों के मुताबिक, 15 सदस्यीय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। चर्चा है कि ट्रस्ट में संत समाज की भागीदारी को और मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि पश्चिम भारत, विशेषकर नासिक क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित धर्माचार्य के नाम पर विचार किया जा रहा है। साथ ही अयोध्या के किसी प्रमुख संत को भी ट्रस्ट में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

अयोध्या से ये नाम चर्चा में

ट्रस्ट में संभावित नए सदस्यों के रूप में दो प्रमुख संतों के नाम सामने आ रहे हैं।

पहला नाम जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर का है, जिन्हें वैदिक परंपरा का विद्वान और संत समाज में व्यापक स्वीकार्यता रखने वाला संत माना जाता है।

दूसरा नाम श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास महाराज का है। संत समाज में उनकी शांत और विवादों से दूर रहने वाली छवि को उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है।

कृष्णमोहन की भूमिका बढ़ने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन को भी भविष्य में बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि राम मंदिर की व्यवस्थाओं और संचालन में उनकी भूमिका बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही सामने आएगा।

ट्रस्ट में सक्रियता पर भी चर्चा

वर्तमान में ट्रस्ट में संत समाज के छह प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन प्रशासनिक गतिविधियों में कुछ ही सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास लंबे समय से अस्वस्थ हैं, जबकि कुछ अन्य संत सदस्य भी नियमित बैठकों और प्रशासनिक कार्यों में कम सक्रिय बताए जाते हैं।

वहीं कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि और स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों, बैठकों और धार्मिक आयोजनों में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

नोट: इस खबर में ट्रस्ट के पुनर्गठन और संभावित बदलावों से जुड़ी कई जानकारियां सूत्रों के हवाले से हैं। इन पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।