UP के बेसिक स्कूलों में शौचालय की सच्चाई अब फोटो से उजागर होगी: शिक्षक प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करेंगे तस्वीरें
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में बालिका शौचालयों के कायाकल्प और स्थिति सुधार के लिए व्यापक कार्रवाई की जा रही है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत सभी बीएसए और बीईओ को स्कूलों में शौचालय की फोटो अपलोड करने और कमियों को दूर कराने का आदेश दिया गया है। प्रत्येक विद्यालय को अपनी शौचालय की फोटो प्रेरणा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी।
समीक्षा में सामने आया है कि कई स्कूलों में शौचालय के दरवाजे बंद रहते हैं, प्रकाश का अभाव होता है, और सीट व फर्श पर गंदगी रहती है। अब विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि फोटो में शौचालय का दरवाजा खुला होना चाहिए, पर्याप्त प्रकाश, पानी की सप्लाई, कुंडी और टाइलिंग का होना अनिवार्य है।
कायाकल्प का हाल
जिले में कुल 2832 परिषदीय स्कूल हैं। बालकों के शौचालय 2829 विद्यालयों में उपलब्ध हैं, जबकि बालिकाओं के शौचालय 2830 विद्यालयों में तैयार हैं। मेजा और सहसों विकासखंड के एक-एक विद्यालय में बालिका शौचालय नहीं है। रनिंग वाटर की सुविधा 2828 विद्यालयों में उपलब्ध है।
शौचालय सुधार में बची कमी
मेजा और प्रतापपुर में एक-एक विद्यालय, नगर क्षेत्र में एक विद्यालय, और अन्य विकासखंडों के कुछ स्कूल टाइलिंग और पानी की सप्लाई में लक्ष्य से पीछे हैं।
दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय
जिले के 284 परिषदीय स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शौचालय नहीं है। सैदाबाद विकासखंड में सभी 145 स्कूलों में यह सुविधा उपलब्ध है। अन्य विकासखंडों में 77 से 97 प्रतिशत स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय उपलब्ध हैं।
विभाग ने सभी स्कूलों से कहा है कि शौचालय की साफ-सफाई, सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित कर फोटो अपलोड करें। लापरवाही पर स्कूलों की जवाबदेही तय होगी।