UP Gram Panchayat: 1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था, ग्राम पंचायतों को मिलेगा श्रेणीवार बजट; विकास कार्य होंगे तेज
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों को अधिक प्रभावी और जरूरत आधारित बनाने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत राज्य की ग्राम पंचायतों को अब तीन श्रेणियों—अच्छी, मध्यम और पिछड़ी—में विभाजित किया जाएगा। इसी वर्गीकरण के आधार पर पंचायतों को बजट का आवंटन किया जाएगा।
नई व्यवस्था 1 जुलाई से लागू होगी, जिसे “विकसित भारत जी-राम-जी” योजना के तहत लागू किया जा रहा है। इस योजना में ग्राम पंचायतों की स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और विकास की आवश्यकता के आधार पर उनका आकलन किया जाएगा। इसके बाद पंचायतों को उनकी श्रेणी के अनुसार कार्ययोजना बनाकर धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी और विकास कार्यों को मंजूरी दी जाएगी।
प्रदेश में कुल 1,148 ग्राम पंचायतें इस नई प्रणाली के दायरे में आएंगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और पिछड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर अधिक संसाधन मिल सकेंगे।
मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों और तकनीकी सहायकों को नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
नई व्यवस्था में श्रमिकों को वर्षभर में अधिकतम 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। साथ ही मजदूरी भुगतान में देरी होने पर श्रमिकों को 0.5 प्रतिशत की दर से प्रतिकर देने की व्यवस्था भी लागू होगी।
परियोजना निदेशक/प्रभारी डीसी मनरेगा दयाराम यादव ने बताया कि ग्राम पंचायतों को श्रेणीवार विभाजित कर कार्ययोजना के आधार पर बजट दिया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गांवों में विकास कार्य तेजी से पूरे होंगे।
वर्तमान में ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त और मनरेगा मद से प्रति वर्ष न्यूनतम दो लाख रुपये से लेकर अधिकतम 40 लाख रुपये तक का बजट प्राप्त होता है। इस बजट से नाला, नाली, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, खड़ंजा और बंधा निर्माण जैसे विकास कार्य कराए जाते हैं।