UP राज्यसभा चुनाव: बिना मतदान के सभी 10 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित, भाजपा के 8 और सपा के 2 उम्मीदवारों की जीत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आठ और समाजवादी पार्टी (SP) के दो उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नाम वापसी की. अंतिम समय-सीमा समाप्त होने के बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा कर दी गई। इसके साथ ही 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता नहीं रही।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे निरस्त कर दिए गए थे। इसके बाद चुनाव मैदान में केवल 10 वैध उम्मीदवार बचे थे। निर्धारित सीटों और उम्मीदवारों की संख्या बराबर होने के कारण सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
भाजपा के ये आठ नेता पहुंचे राज्यसभा
भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में आठ सीटों पर जीत दर्ज की है। निर्वाचित उम्मीदवारों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह, भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पाण्डेय, रामप्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
भाजपा ने इस बार उम्मीदवारों के चयन में जातीय और सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा है। पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व के साथ पिछड़ा वर्ग, दलित और अन्य सामाजिक वर्गों के नेताओं को अवसर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह फैसला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जुड़ा है।
समाजवादी पार्टी के दोनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव एक बार फिर राज्यसभा पहुंच गए हैं। उनके साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक धनराज परिमल नथवानी भी सपा के टिकट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
राज्यसभा चुनाव में सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अंततः तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया। इससे चुनावी मुकाबले की संभावना समाप्त हो गई और दोनों दलों के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।
दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन हुए निरस्त
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को हुई थी। इस दौरान निर्दलीय प्रत्याशी कांते सायन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र अनिवार्य औपचारिकताएं पूरी नहीं करने के कारण खारिज कर दिए गए।
निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के अनुसार, भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों के नामांकन वैध पाए गए थे। दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज होने के बाद किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं रहने से निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।
राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त
इस चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की इन 10 सीटों का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। भाजपा ने आठ सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है, जबकि समाजवादी पार्टी के हिस्से में दो सीटें आई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को कोई सीट नहीं मिली है। इसके साथ ही राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की इन सीटों पर नए सदस्यों के निर्वाचन को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। भाजपा जहां अपने आठ उम्मीदवारों की जीत को संगठनात्मक मजबूती के रूप में देख रही है, वहीं समाजवादी पार्टी ने अपने दोनों प्रत्याशियों को बिना मुकाबले संसद के उच्च सदन में पहुंचाने में सफलता हासिल की है।