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UP को मिलेगा नया विधानसभा भवन, गोमतीनगर के सहारा शहर में बनेगा अत्याधुनिक कॉम्पलेक्स
 

 

Lucknow। उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र माने जाने वाला हजरतगंज स्थित ऐतिहासिक विधानसभा भवन अब जल्द ही नई भूमिका में नजर आएगा। करीब 98 साल पुरानी यह इमारत अपनी जगह पर बनी रहेगी, लेकिन भविष्य में यहां विधानसभा की कार्यवाही नहीं होगी। प्रदेश सरकार अब राजधानी लखनऊ में एक नए और आधुनिक विधानसभा भवन के निर्माण की तैयारी में जुट गई है।

नया विधानसभा भवन गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की जमीन पर बनाया जाएगा। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने डिजाइनिंग और प्लानिंग हेतु कंसल्टेंट एवं आर्किटेक्ट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का रास्ता साफ हो गया है।

डिजाइन और प्लानिंग के लिए टेंडर जारी

एलडीए की ओर से जारी आरएफपी के अनुसार कंपनियां 23 मई से 21 जून तक आवेदन कर सकेंगी। कंसल्टेंट चयन के बाद डीपीआर तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर भवन की डिजाइन, निर्माण अवधि और परियोजना लागत तय होगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

98 साल पुराना है मौजूदा विधानसभा भवन

हजरतगंज स्थित वर्तमान विधानसभा भवन का उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को हुआ था। यह इमारत आजादी से पहले और बाद की राजनीति की गवाह रही है। कांग्रेस शासन से लेकर गठबंधन सरकारों तक सत्ता के कई दौर इस भवन ने देखे हैं। माना जा रहा है कि नया भवन बनने में कम से कम दो साल लगेंगे, ऐसे में वर्तमान भवन अपने 100 वर्ष पूरे करने के बाद ही ‘रिटायर’ होगा।

सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर बनेगा नया परिसर

सूत्रों के मुताबिक नया विधानसभा भवन परिसर दिल्ली के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यह कॉम्पलेक्स भव्य और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। परियोजना पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

इस परिसर में विधानसभा भवन, विधान परिषद भवन, मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के चैंबर, विधायकों के कार्यालय, सचिवालय दफ्तर और मुख्यमंत्री आवास भी बनाए जाएंगे।

245 एकड़ में विकसित होगा नया विधानसभा परिसर

बताया जा रहा है कि गोमतीनगर के विपुल खंड स्थित सहारा शहर की 245 एकड़ भूमि पर यह परियोजना विकसित होगी। इसमें 170 एकड़ जमीन नगर निगम और 75 एकड़ जमीन एलडीए की है।

यह जमीन वर्ष 1994 में Sahara India Pariwar को डेवलपमेंट के उद्देश्य से लीज पर दी गई थी, लेकिन शर्तों का पालन न होने और कथित दुरुपयोग के आरोपों के चलते 9 अक्टूबर 2025 को नगर निगम ने इसकी लीज रद्द कर दी थी। अब यह जमीन दोबारा सरकार के नियंत्रण में आ चुकी है।

तकनीकी सहयोग के लिए समझौता

एलडीए ने इस परियोजना के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ तकनीकी सहयोग का समझौता भी किया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

क्यों जरूरी है नया विधानसभा भवन?

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में विधानसभा की 403 सीटें हैं। भविष्य में महिलाओं को आरक्षण और नए परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मौजूदा विधानसभा भवन भविष्य की जरूरतों के हिसाब से छोटा पड़ सकता है। यही वजह है कि अधिक क्षमता और आधुनिक सुविधाओं वाले नए विधानसभा भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।