अब गंगा में नहीं गूंजेगा डीजल इंजन का शोर! वाराणसी में लॉन्च हुई 25-सीटर इलेक्ट्रिक नाव
वाराणसी। गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में वाराणसी में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप (डीएस ग्रुप) ने आईएक्स एनर्जी के सहयोग से 25-सीटर डीजल नाव को सफलतापूर्वक इलेक्ट्रिक नाव में परिवर्तित कर उसका उद्घाटन किया।
इस पहल का उद्देश्य वाराणसी में संचालित डीजल चालित नावों को बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक नावों में बदलने के लिए सरकारी विभागों, उद्योग जगत और नाव संचालक समुदाय के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत तैयार की गई यह इलेक्ट्रिक नाव स्वच्छ, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल नदी परिवहन का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
डीएस ग्रुप के महाप्रबंधक (सस्टेनेबिलिटी एवं सीएसआर) प्रभाकांत जैन ने कहा कि सतत विकास समूह की सामुदायिक और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं का प्रमुख आधार है। उन्होंने बताया कि इस पायलट परियोजना ने साबित किया है कि स्वच्छ नदी परिवहन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि स्थानीय मल्लाह समुदाय के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि डीजल नाव को इलेक्ट्रिक नाव में परिवर्तित करने की यह सफलता गंगा तट पर वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा तथा गंगा घाटों का वातावरण अधिक स्वच्छ और शांत बनेगा।
80 से 85 किलोमीटर तक चलेगी नाव
नई इलेक्ट्रिक नाव 35 किलोवाट-घंटा क्षमता की बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, गियरबॉक्स और अन्य आधुनिक प्रणालियों से लैस है। एक बार पूर्ण चार्ज होने पर यह नाव नदी की धारा के विपरीत दिशा में संचालन सहित लगभग 80 से 85 किलोमीटर तक चल सकती है। वहीं अस्सी घाट और नमो घाट के बीच यह नाव 3 से 4 चक्कर लगाने में सक्षम है।
मल्लाहों की लागत होगी कम
परियोजना के तहत नाव संचालकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। डीजल पर होने वाला खर्च कम होने से संचालन लागत में कमी आएगी। इसके लिए प्रमुख घाटों पर चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं और बैटरी चार्जिंग को सुविधाजनक बनाने हेतु लंबी चार्जिंग केबल भी उपलब्ध कराई गई हैं।
छह घाटों का रखरखाव करता है डीएस ग्रुप
धर्मपाल सत्यपाल फाउंडेशन के माध्यम से डीएस ग्रुप वाराणसी के चेत सिंह घाट, शिवाला घाट, महानिर्वाणी घाट, गुलरिया घाट, निरंजनी घाट और दंडी घाट का रखरखाव करता है। इन घाटों पर नियमित सफाई, पेयजल सुविधाएं तथा विभिन्न सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियों को समर्थन दिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाराणसी में इलेक्ट्रिक नावों का बढ़ता उपयोग न केवल प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगा, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डीएस ग्रुप की यह पहल अन्य नदी तटीय शहरों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।
