Movie prime

अमेरिका से भारतीयों के लिए बड़ी खुशखबरी! H-1B वीजा पर 85 लाख रुपये की फीस नहीं लगेगी

अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) की प्रस्तावित फीस को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है। फैसले से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और विदेशी कर्मचारियों को राहत मिली है। जानिए पूरा मामला और इसका भारत पर असर।

 
 H-1B वीजा
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

H-1B Fee Cancelled: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे लाखों भारतीय इंजीनियरों, आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस योजना को रद्द कर दिया है, जिसके तहत H-1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 85 लाख रुपये) की भारी फीस वसूले जाने का प्रस्ताव था।

फेडरल कोर्ट के इस फैसले के बाद भारतीय पेशेवरों और विदेशी स्किल्ड कर्मचारियों को अमेरिका में रोजगार पाने की राह आसान होती दिखाई दे रही है। साथ ही उन कंपनियों को भी राहत मिली है जो तकनीकी और विशेषज्ञ पदों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं।

क्या था पूरा मामला?

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा प्रोग्राम में बड़े बदलाव की योजना बनाई थी। इसके तहत नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी कंपनियां स्थानीय कर्मचारियों की बजाय कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी दे रही हैं। इसी वजह से H-1B वीजा को महंगा बनाकर विदेशी भर्ती को सीमित करने की कोशिश की गई थी। अगर यह नियम लागू हो जाता तो अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय युवाओं और पेशेवरों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता।

कोर्ट ने क्यों रद्द किया फैसला?

अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने इस प्रस्ताव को गैरकानूनी करार दिया है। बोस्टन के फेडरल जज लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह का अतिरिक्त शुल्क या टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है। ऐसे किसी भी वित्तीय प्रावधान के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होती है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की फीस सामान्य प्रशासनिक शुल्क नहीं बल्कि एक प्रकार का टैक्स थी, जिसे कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू नहीं किया जा सकता।

भारतीयों पर पड़ रहा था सीधा असर

H-1B वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र के पेशेवरों को मिलता है। हर साल हजारों भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, डेटा साइंटिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ इसी वीजा के जरिए अमेरिका में रोजगार प्राप्त करते हैं।

फीस बढ़ने की आशंका के बाद कई अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर सतर्क हो गई थीं। इसका असर भारत से अमेरिका जाने वाले कुशल पेशेवरों पर पड़ रहा था।

यूएससीआईएस के आंकड़ों के अनुसार H-1B वीजा आवेदन में भी गिरावट दर्ज की गई थी। कई भारतीय पेशेवरों को नौकरी के अवसर कम होने का सामना करना पड़ा और कुछ मामलों में लोगों को भारत लौटने तक की नौबत आ गई थी।

भारतीय आईटी कंपनियों को भी मिलेगा फायदा

इस फैसले का फायदा केवल व्यक्तिगत कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि भारतीय आईटी कंपनियों को भी मिलेगा।

भारत की कई बड़ी टेक कंपनियां अमेरिका में अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा के जरिए भेजती हैं। भारी फीस लागू होने की स्थिति में इन कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता था। अब कोर्ट के फैसले के बाद कंपनियां पहले की तरह विदेशी विशेषज्ञों की नियुक्ति और तैनाती जारी रख सकेंगी।

H-1B वीजा आखिर है क्या?

H-1B अमेरिका का एक विशेष वर्क वीजा प्रोग्राम है, जिसके तहत विदेशी नागरिकों को विशेष कौशल वाली नौकरियों के लिए अमेरिका में काम करने की अनुमति दी जाती है।

यह वीजा मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, फाइनेंस, रिसर्च और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के पेशेवरों को जारी किया जाता है। भारतीय नागरिक H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं और हर वर्ष जारी होने वाले कुल H-1B वीजा का बड़ा हिस्सा भारतीयों को मिलता है।

आगे क्या हो सकता है?

हालांकि अदालत ने फिलहाल ट्रंप प्रशासन की योजना को रद्द कर दिया है, लेकिन भविष्य में इस फैसले को चुनौती दी जा सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करता है तो मामला उच्च अदालतों तक जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में 1 लाख डॉलर की प्रस्तावित फीस पूरी तरह निरस्त हो चुकी है।

भारतीय युवाओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अमेरिका में रोजगार की तलाश कर रहे भारतीय युवाओं को राहत मिलेगी।

  • H-1B वीजा की लागत सामान्य स्तर पर बनी रहेगी।
  • अमेरिकी कंपनियां विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती जारी रख सकेंगी।
  • भारतीय आईटी पेशेवरों के अवसर बढ़ सकते हैं।
  • अमेरिका में उच्च वेतन वाली नौकरियों तक पहुंच आसान होगी।

अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी प्रतिभाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में H-1B वीजा पर प्रस्तावित भारी शुल्क का हटना भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।