भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस, आतंकवाद से ट्रेड मुद्दों तक क्या-क्या हुआ?
नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई अहम बैठक में रक्षा, आतंकवाद, व्यापार, इंडो-पैसिफिक और पश्चिम एशिया समेत कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और रिश्तों को वैश्विक स्तर पर अहम करार दिया।
S Jaishankar Marco Rubio Meeting: नई दिल्ली में रविवार को भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर एक बड़ा और अहम संदेश दुनिया के सामने आया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ बैठक के दौरान भारत को अमेरिका का “सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार” बताया। दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में रक्षा सहयोग, आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया और QUAD जैसे अहम वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
हैदराबाद हाउस में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रुबियो ने साफ कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता सिर्फ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली साझेदारी बन चुका है।
“भारत सिर्फ सहयोगी नहीं, अमेरिका का रणनीतिक साझेदार”: रुबियो
बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका के दुनिया भर में कई सहयोगी और साझेदार देश हैं, लेकिन भारत के साथ उसका रिश्ता अलग और बेहद खास है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी का मतलब सिर्फ कूटनीतिक संबंध नहीं होता, बल्कि दोनों देशों के हितों का गहराई से जुड़ना होता है।
रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य दोनों देशों को स्वाभाविक रूप से करीब लाते हैं। उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता, जवाबदेह शासन व्यवस्था और मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे को दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत नींव बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को “फिर से मजबूत करने” जैसी कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही बेहद मजबूत और स्थिर हैं। अब लक्ष्य इस साझेदारी को और आगे बढ़ाना है।
आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा पर साझा चिंता
बैठक के दौरान आतंकवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। रुबियो ने कहा कि वैश्विक आतंकी नेटवर्क दोनों देशों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं और इस खतरे से निपटने के लिए भारत और अमेरिका को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया और कहा कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नियंत्रण स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। माना जा रहा है कि उनका यह बयान होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की चेतावनियों के संदर्भ में था।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी साफ कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम करता है और इस क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
रक्षा सहयोग और नई रणनीतिक योजनाओं पर चर्चा
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग इस बैठक का अहम हिस्सा रहा। जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों ने 10 वर्षीय मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को अपडेट किया है।
इसके अलावा अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस को लेकर व्यापक रोडमैप एग्रीमेंट पर भी चर्चा हुई। बैठक में “Make in India” को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और हालिया वैश्विक संघर्षों से मिले अनुभवों को साझा करने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चर्चा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
व्यापार, ऊर्जा और तकनीक पर भी फोकस
दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग को लेकर भी अहम बातचीत की। जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में काम चल रहा है। भारतीय टीम अमेरिका जा चुकी है और जल्द अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आने वाला है।
ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत की प्राथमिक जिम्मेदारी 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। इसी वजह से ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग को और मजबूत किया जा रहा है।
बैठक में परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, AI सहयोग और उभरती तकनीकों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने अमेरिकी पक्ष के सामने वैध भारतीय यात्रियों को वीजा जारी करने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी से भी मिले थे रुबियो
मार्को रुबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के मुताबिक बैठक में रक्षा, निवेश, व्यापार, कनेक्टिविटी और शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निमंत्रण भी सौंपा। बताया गया कि ट्रंप ने पीएम मोदी को जल्द व्हाइट हाउस आने के लिए आमंत्रित किया है।
QUAD बैठक और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर नजर
रुबियो की भारत यात्रा को QUAD समूह की आगामी बैठक से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को लेकर QUAD देशों के बीच रणनीतिक समन्वय और मजबूत किया जा सकता है।
बदलती वैश्विक राजनीति में मजबूत हो रही भारत-अमेरिका साझेदारी
भारत और अमेरिका के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दुनिया पश्चिम एशिया संघर्ष, यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
ऐसे माहौल में दोनों देशों का रणनीतिक रूप से और करीब आना वैश्विक राजनीति के लिए भी अहम संकेत माना जा रहा है। मार्को रुबियो के बयान ने साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका साझेदारी सिर्फ द्विपक्षीय संबंध नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा केंद्र बनने जा रही है।
