UP में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त, पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी, जानें कब हो सकते हैं पंचायत चुनाव
May 24, 2026, 10:59 IST
WhatsApp Channel
Join Now
Facebook Profile
Join Now
Instagram Profile
Join Now
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर लगभग विराम लग गया है। अब प्रदेश में पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की तैयारी है।
प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायतीराज विभाग ने कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को भेज दिया है।
हालांकि पंचायतीराज मंत्री Om Prakash Rajbhar का कहना है कि अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है और प्रस्ताव मुख्यमंत्री के विचाराधीन है।
ग्राम पंचायत सहायकों को बनाया जा सकता है प्रशासक
कुछ दिन पहले पंचायतीराज विभाग ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों का कामकाज संभालने के लिए प्रशासक नियुक्त करने या प्रशासनिक समिति गठित करने का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा था।
विभाग के निदेशक Amit Singh ने स्पष्ट किया था कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
उन्होंने बताया था कि शासन स्तर से प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी और ग्राम पंचायत सहायकों को प्रशासक बनाए जाने का प्रावधान मौजूद है। चुनाव होने तक वही पंचायतों का कामकाज संभालेंगे।
आखिर क्यों टाले जा रहे पंचायत चुनाव?
पंचायत चुनाव टालने के पीछे कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं।
1. वोटर लिस्ट अभी तैयार नहीं
पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है। जबकि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। अंतिम सूची 10 जून को जारी होनी है।
2. OBC आरक्षण तय होना बाकी
सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आयोग को रिपोर्ट देने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होगी।
3. विधानसभा चुनाव के बाद चुनाव कराने की तैयारी
सरकार पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि कई राजनीतिक दल भी इस पर सैद्धांतिक सहमति जता चुके हैं। हालांकि यह मामला अभी Allahabad High Court में विचाराधीन है।
प्रधान संगठन ने प्रशासनिक समिति की मांग की थी
Rashtriya Panchayati Raj Gram Pradhan Sangathan के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Singh ने पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्रशासनिक समिति बनाने की मांग की थी।
संगठन का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को प्रशासक बनाए जाने से गांवों में कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
प्रशासक नियुक्त होने पर क्या हैं चिंताएं?
प्रधान संगठन का दावा है कि बाहरी अधिकारियों को प्रशासक बनाने से वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ जाती है।
संगठन के अनुसार वर्ष 2021 में प्रशासकों ने करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन उसका पूरा हिसाब स्पष्ट नहीं हो पाया था।
इसके अलावा प्रशासक स्थानीय निवासी नहीं होते, इसलिए उन्हें गांव के सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने की उतनी जानकारी नहीं होती जितनी निर्वाचित ग्राम प्रधानों को होती है।
प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायतीराज विभाग ने कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को भेज दिया है।
हालांकि पंचायतीराज मंत्री Om Prakash Rajbhar का कहना है कि अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है और प्रस्ताव मुख्यमंत्री के विचाराधीन है।
ग्राम पंचायत सहायकों को बनाया जा सकता है प्रशासक
कुछ दिन पहले पंचायतीराज विभाग ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों का कामकाज संभालने के लिए प्रशासक नियुक्त करने या प्रशासनिक समिति गठित करने का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा था।
विभाग के निदेशक Amit Singh ने स्पष्ट किया था कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
उन्होंने बताया था कि शासन स्तर से प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी और ग्राम पंचायत सहायकों को प्रशासक बनाए जाने का प्रावधान मौजूद है। चुनाव होने तक वही पंचायतों का कामकाज संभालेंगे।
आखिर क्यों टाले जा रहे पंचायत चुनाव?
पंचायत चुनाव टालने के पीछे कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं।
1. वोटर लिस्ट अभी तैयार नहीं
पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है। जबकि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। अंतिम सूची 10 जून को जारी होनी है।
2. OBC आरक्षण तय होना बाकी
सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आयोग को रिपोर्ट देने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होगी।
3. विधानसभा चुनाव के बाद चुनाव कराने की तैयारी
सरकार पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि कई राजनीतिक दल भी इस पर सैद्धांतिक सहमति जता चुके हैं। हालांकि यह मामला अभी Allahabad High Court में विचाराधीन है।
प्रधान संगठन ने प्रशासनिक समिति की मांग की थी
Rashtriya Panchayati Raj Gram Pradhan Sangathan के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Singh ने पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्रशासनिक समिति बनाने की मांग की थी।
संगठन का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को प्रशासक बनाए जाने से गांवों में कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
प्रशासक नियुक्त होने पर क्या हैं चिंताएं?
प्रधान संगठन का दावा है कि बाहरी अधिकारियों को प्रशासक बनाने से वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ जाती है।
संगठन के अनुसार वर्ष 2021 में प्रशासकों ने करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन उसका पूरा हिसाब स्पष्ट नहीं हो पाया था।
इसके अलावा प्रशासक स्थानीय निवासी नहीं होते, इसलिए उन्हें गांव के सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने की उतनी जानकारी नहीं होती जितनी निर्वाचित ग्राम प्रधानों को होती है।
