नई दिल्ली I सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को मकान गिराने के मामले में कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अधिकारियों की इस कार्रवाई को अमानवीय और अवैध करार दिया। Supreme Court जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि इस तरह से लोगों के रिहायशी घरों को गिराना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस कार्रवाई ने हमारी अंतरात्मा को झकझोर दिया है।
पीड़ितों को मिलेगा 10-10 लाख रुपये मुआवजा
Supreme Court ने प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को आदेश दिया कि जिन लोगों के मकान गिराए गए हैं, उन्हें छह हफ्तों के भीतर 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। कोर्ट ने ‘राइट टू शेल्टर’ (आवास का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि उचित प्रक्रिया के बिना किसी भी नागरिक के घर को तोड़ना गलत है।
गलती से गिरा दिए थे 5 मकान
2021 में प्रयागराज प्रशासन ने गैंगस्टर अतीक अहमद की संपत्ति समझकर एक वकील, प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के मकान गिरा दिए थे। Supreme Court में वकील जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य ने याचिका दाखिल की थी, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।
अंबेडकर नगर की घटना का भी जिक्र
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में 24 मार्च 2025 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान एक आठ साल की बच्ची अपनी किताबें लेकर भाग रही थी। इस तस्वीर ने सबको झकझोर दिया था।

Supreme Court ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा कि मकान तोड़ने का नोटिस सही तरीके से क्यों नहीं दिया गया? नोटिस कूरियर से भेजने के बजाय घर के बाहर क्यों चिपकाया गया? कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अधिकारियों का रवैया अन्यायपूर्ण और क्रूर था।
अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने Supreme Court के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि घर टूटने का जख्म पैसों से नहीं भरा जा सकता। उन्होंने X पर लिखा कि न्याय की जीत हुई है, लेकिन जिनके घर उजड़ गए, उनके दर्द की भरपाई संभव नहीं।