New Delhi : वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने (US Tariff Impact) और इसके भारत पर प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। पीएफआरडीए (PFRDA) के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भारत फर्स्ट’ (India First) को प्राथमिकता देते हैं। चौधरी ने आगे कहा कि हम अमेरिका के जवाबी शुल्क के प्रभाव का मूल्यांकन कर रहे हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क लगाता है। इस कदम का उद्देश्य अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना और विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ावा देना है। ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की ऐतिहासिक घोषणा की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस टैरिफ से अमेरिका को भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, जिन्हें अधिक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका के 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में सभी आयात पर 10% शुल्क 5 अप्रैल से और शेष 16% शुल्क 10 अप्रैल से लागू होगा। अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय इन शुल्कों के प्रभाव का अध्ययन कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई देश अमेरिका की चिंताओं का समाधान करता है, तो ट्रंप प्रशासन शुल्क में छूट पर विचार कर सकता है।
भारत और अमेरिका पहले से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश इस साल सितंबर-अक्टूबर तक समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की योजना बना रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि यह भारत के लिए झटका नहीं, बल्कि मिला-जुला परिणाम है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित विभिन्न देशों पर शुल्क लगाने की घोषणा करते हुए कहा कि 2 अप्रैल, 2025 को ‘लिबरेशन डे’(Liberation Day) के रूप में याद किया जाएगा। यह वह दिन होगा जब अमेरिकी उद्योग का पुनर्जन्म होगा और अमेरिका फिर से समृद्ध बनेगा। उन्होंने भारत द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्कों का जिक्र करते हुए 26 प्रतिशत ‘रियायती जवाबी शुल्क’ की घोषणा की।
वाणिज्य मंत्रालय इस स्थिति से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और व्यापार समझौते के जरिए इसका समाधान निकाल सकता है।